मेडिकल अफसरों को मातृ मृत्यु दर कम करने का प्रशिक्षण

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झांसी – मेडिकल कालेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में स्टेट इनोवेशन इन फैमिली प्लानिंग सर्विस प्रोजेक्ट एजेंसी (सिप्सा) द्वारा आयोजित स्किल बर्थ अटेण्डेंस ट्रेनिंग फार द मेडिकल अफसरं नामक प्रशिक्षण कार्यक्रम की शरुआत की गई, प्रशिक्षण कार्यक्रम में बुन्देलखण्ड क्षेत्र के मेडिकल अफसरों को मातृ मृत्यु दर कम करने के तरीके बताए गए।

महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में आयोजित कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. गणेश कुमार आनन्द ने कहा कि महिलाएं आमतौर पर इलाज साधनों के अभाव व कम जागरूकता के कारण अपने स्वास्थ्य का ख्याल नहीं रखती हैं, जबकि बच्चों को पैदा करने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आनन्द ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योकि  वह अपने पेट में एक बच्चे को पाल रही होती हैं। दुर्भाग्य से चिकित्सकों के अन्दर जागरूकता का अभाव होने के कारण वह गर्भवती महिलाओं को उचित सलाह नहीं दे पाते हैं, इस कमी को दूर करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरूआत की है।

स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डा. संजया शर्मा ने जानकारी दी कि गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए सरकार ने विभिन्न योजनाएं संचालित कर रखीं हैं। बावजूद इसके महिलाएं इनका लाभ प्राप्त नहीं करती हैं। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की वरिष्ठ चिकित्सक डा. सुशीला खर्कवाल ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को प्रत्येक माह अपने स्वास्थ्य की जांच करानी चाहिए। इसके लिए उन्हें नजदीक के स्वास्थ्य केन्द्र व अस्पताल में जरूर जाना चाहिए।

प्रो. बी. डी माथुर ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले बैच में झांसी, ललितपुर, जालौन, महोबा, हमीरपुर,बांदा व चित्रकूट जिले के छह मेडिकल आफिसरों को ट्रेनिंग दी जा रही है। इस मौके पर सिप्सा की प्रोजेक्ट मैनेजर डा. फिरदौस सिद्दीकी ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का लक्ष्य सन 2012 तक क्षेत्र में मातृ मृत्यु दर को प्रति एक लाख महिला आबादी पर 258 लाना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में डा. लक्ष्मी जाटव, डा. बी डी माथुर, डा. विद्या चौधरी, डा. हेमा जे शोभने, डा. रजनी व डा.प्रीति गौतम आदि उपस्थित रहीं।

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