मृदा जांच के नमूने चौंकाने वाले

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झांसी- मिट्टी की बिगड़ती सेहत को सम्भालने के लिए प्रदेश सरकार ने अपनी मिट्टी पहचानो’ अभियान चला रखा है। इसके कई चरण सम्पन्न हो चुके है, किन्तु जागरुकता के अभाव व अधिक की चाहत में बदतर हो रहे हालात को सम्भाल पाना मुश्किल दिखाई दे रहा है। सहायक निदेशक मृदा परीक्षण एसबी सिंह ने बताया कि 11 जून तक चले मिट्टी पहचानो अभियान में मण्डल में लक्ष्य 63440 के विपरीत 45318 नमूने भरे जा सके है।

सिंह ने बताया कि बुन्देलखण्ड में मृदा जांच के नमूने चौंकाने वाले है। खेतों में पोषक तत्वों में आधे से अधिक गिरावट है। मिट्टी का सबसे महत्वपूर्ण तत्व जीवांश कार्बन 5 प्रतिशत से घट कर 2 व 3 के बीच पहुंच गया है और इसमें सुधार नहीं हुआ तो भविष्य में हरित क्रांति का रंग फीका पड़ जाएगा व पोषक तत्वों की कमी से बीमार मृदा मुर्दा हो जाए तो आश्चर्य नहीं। ऐसे में रोटी-दाल के भी लाले पड़ सकते है। इसके लिए चौंकने की नहीं, जरूरत है चेतने व समय रहते मृदा जांच करा कर पोषक तत्व उपलब्ध कराने की। कृषि वैज्ञानिक पहले से ही हैरानी जाहिर कर चुके है। लगातार डीएपी के अतिशय प्रयोग से मिट्टी में जीवांश कार्बन के साथ फास्फेट, पोटाश, सल्फर, जिंक, लोहा, कापर, मैगजीन आदि पोषक सूक्ष्म तत्वों में काफी गिरावट आई है। इस तरह बंजर होती मिट्टी से अधिक उत्पादन की उम्मीद कैसे की जा सकती है। बीमार मिट्टी को बचाने के लिए किसान जैविक खाद का अधिक से अधिक प्रयोग करे। नेडप व वर्मी कम्पोस्ट हेतु कृषि विभाग द्वारा दिए जा रहे अनुदान का लाभ उठाएं। मिट्टी की जांच कराए बिना उर्वरकों का प्रयोग नहीं करे। जीवांश कार्बन बढ़ने से अन्य सूक्ष्म तत्वों में बढ़ोत्तरी के साथ मिट्टी की ताकत बढ़ेगी।