मूर्तियों का विर्सजन आज होगा, प्रशासन की तैयारी पूरी

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चित्रकूट- मुख्यालय व आसपास के स्थानों में सजाई गई मां दुर्गा की मूर्तियों का विर्सजन मंगलवार को किया जायेगा। मूर्ति विर्सजन को लेकर प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली है। धर्मनगरी में रामघाट, भरतघाट व राघव प्रयाग घाट में मूर्तियों का विर्सजन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।

मुख्यालय में मूर्तियों के विर्सजन के लिये तीन स्थान चिन्हित किये गये हैं। वहीं धर्मनगरी में प्रशासन ने तय किया है कि रामघाट, भरतघाट व राघव प्रयाग घाट में कोई भी मूर्ति विर्सजन नही कर पायेगा। इसके लिये इन घाटों को जाने वाले सभी मार्गो में वैरीकेटिंग रविवार को ही लगा दी गई है। वहीं मंदाकिनी की सफाई पर लाखों रूपये खर्च करने वाले सतना जिला प्रशासन ने मूर्ति विसर्जन को लेकर एक अलग ही तरह की कार्य योजना बनाई है। इस कार्य योजना का प्रमुख हिस्सा यह है कि किसी भी दशा में देवी मूर्तियों को मंदाकिनी के सीधे प्रवाह में न डाला जाये बल्कि इसके लिये व्यवस्था भी कर दी गई है। मोहकमगढ के पास चिल्लाघाट में मूर्तियों का विर्सजन किया जायेगा।

चित्रकूट के एसडीएम गजेन्द्र सिंह कहते हैं कि इस बार किसी भी कीमत में मूर्तियों को मंदाकिनी की मेन स्ट्रीम में नही डालने दिया जायेगा। इसके लिये मंदाकिनी से मिलने वाले सहायक नाले का चुनाव किया गया है। वैसे इस नाले के मंदाकिनी से जुड़ने वाले स्थान पर जेसीवी से गड्डा भी करा दिया गया है। मूर्तियों का विसर्जन गड्डे से लगभग बीस मीटर दूरी पर कराया जायेगा। जिससे पहले तो मूर्तियां वही पर डाले जाने के बाद ही नष्ट हो जायेगी और अगर उनमें कुछ बचा तो वे आगे जाकर नष्ट हो जायेगी।

उन्होंने बताया कि चित्रकूट में इस मामले को लेकर कई दौरों पर बैठक हुई और इसमें स्थानीय नागरिकों के साथ ही संत समाज के लोग भी मौजूद रहे। मंदाकिनी के अविरल प्रवाह के लिये संत समाज ने उनकी काफी मदद की। गायत्री परिवार के डा. राम नारायण त्रिपाठी कहते हैं कि मूर्तियों के विर्सजन के लिये भूविर्सजन सबसे अच्छा विकल्प है। उन्होंने पांडाल संचालकों से मूर्तियों का भूविर्सजन करने की अपील की है।