मुख्य न्यायायिक मजिस्ट्रेेट ने एसओ से कहा सचिव के खिलाफ दर्ज करें रिपोर्ट

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नियमों को ताक पर रख जॉब कार्ड बनाने का मामला
फर्जी मास्टर रोल भर कर निकाल लिया मजदूरी का रुपया

पहले तो सचिव ने नियमों को ताक पर रखते हुए एक ही जॉब कार्ड में पूरे परिवार का नाम चढ़ा दिया। जब इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से हुई तो शिकायतकर्ता की फोटो जॉब कार्ड से हटा दी। लेकिन मास्टर रोल में  सभी के नाम मजदूरी भरते हुए फर्जी तरीके से अंगूठा लगा सरकारी धन हड़प लिया गया। जिसकी जांच शिकायतकर्ता के वकील ने करवाई तो मुख्य न्यायायिक मजिस्ट्रेट ने रिपोर्ट दर्ज कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। 

मामला रैपुरा थानान्तर्गत भोरी गांव का है। यहां रहने वाले चन्द्रकेश पुत्रा दातादीन ने बताया कि उसके गांव में तैनात सचिव बालेश्वर कुशवाहा ने सन् 2006 में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना जो अब मनरेगा के नाम से संचालित हो रही के तहत उसका नाम  पंजीकृत करते हुए जॉब कार्ड बनाया था। जिसमें उसने उसकी पत्नी ममता का नाम भी लिखा था। लेकिन इसके साथ नियमों को ताक में रख भाई लवकुश व माता देवरती का भी नाम दर्ज किया था। उसने बताया कि जब इसकी शिकायत की गई तो सचिव व  क्षेत्रा पंचायत सदस्य ने उसकी फोटो जॉब कार्ड से निकाल दी। साथ ही उसका व पत्नी के अलावा मां  और भाई के नाम फर्जी मास्टर रोल भर कर अंगूठा लगाते हुए मजदूरी करना दिखा कर पैसा निकाल लिया। चन्द्रकेश ने बताया उसके व परिवार के नाम भरे गए फर्जी मास्टर रोल में सचिव ने उन लोगों को नहर की सफाई में 8-8 दिन का कार्य करने की मजदूरी दिखाई गई है। उसने आरोप लगाया कि सचिव ने ग्राम पंचायत सदस्य व मेठ देवेन्द्र कुमार के साथ मिली भगत करते हुए शासन के धन का बन्दरबांट करने के लिए ही ऐसा किया गया है। जबकि उसके ठीक विपरीत उसके परिवार ने कभी काम नहीं किया। चन्द्रकेश के वकील रुद्र प्रसाद मिश्रा ने बताया कि सचिव व अन्य लोगों द्वारा की गई इस हेराफेरी की शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहंी हुई। जिससे परेशान हो उन्होंने पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए मुख्य न्यायायिक मजिस्ट्रेट की अदालत प्रार्थना पत्रा दिया। जिसके बाद सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायायिक मजिस्ट्रेट ने एस ओ रैपुरा को दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।