मिडिल स्कूल भवनों में लग रहे हैं हाई स्कूल

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सागर शिक्षा की सुविधा के विस्तार के नाम पर जिले में दो साल पहले खुले 44 हाई स्कूलों में एक स्कूल का भवन अब तक नहीं बना हैं। जिससे 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों को मिडिल स्कूलों में टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। प्राचार्य और शिक्षक मिडिल स्कूलों के फर्नीचर पर निर्भर हैं। इस बार हाई स्कूल परीक्षा का परिणाम अच्छा न रहने के कारण फेल विद्यार्थियोंने एक बार फिर कक्षा 10वीं में ही दाखिला ले लिया है।

जिससे मिडिल स्कूलों के कमरे विद्यार्थियों की अधिक संख्या के चलते कम पड़ रहे हैं। शहर में तिली वार्ड स्थित हाई स्कूल के विद्यार्थियों को मिडिल स्कूल भवन के दो कमरों में बैठकर पढ़ना पड़ रहा है। प्राचार्य अनिल मिश्र का कहना है कि ऐसे में परेशानी तो हो रही है। लेकिन क्या करें। स्कूल भवन के लिए भूमि तलाश ली है। प्रकरण राजस्व विभाग को सौंप दिया है। यह हाल अकेले सागर ब्लाक के नए हाई स्कूलों का नहीं जिले के अन्य 10 विकासखंडों के स्कूलों का है। मिडिल स्कूलों में छुट्टी हो जाती है तो हाई स्कूल लगती है।
शासन ने इन नए स्कूलों के भवन के लिए अब तक न तो धन दिया है न जमीन ही मुहैया कराई है। वहीं दूसरी ओर सर्व शिक्षा कार्यक्रम के तहत जिले के सभी प्राइमरी और मिडिल स्कूलों के भवन बन गए हैं। जिला शिक्षा केंद्र का दावा है कि कोई स्कूल ऐसा नहीं है जो स्वयं के भवन में न लगता हो। जिला शिक्षा अधिकारी आरएन शुक्ला का कहना है कि नए हाई स्कूलों के भवन और फर्नीचर के बारे में शासन जो निर्णय लेगा उसका क्रियान्वयन किया जाएगा। फिलहाल इन स्कूलों के लिए भवन स्वीकृत नहीं किए गए हैं। जब तक इनके भवन नहीं बन जाते है तब तक यह मिडिल स्कूलों में लगेंगे। प्राचार्य और शिक्षकों की व्यवस्था हो रही है।

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