मिट्टी में नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी से घट रही उर्वरा शक्ति

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महोबा- जिले में चलाये गये अपनी मिट्टी पहचानो अभियान में आयी रिपोर्ट के अनुसार निष्कर्ष यह है कि जनपद में धरती की उर्वरा शक्ति लगातार कम हो रही है। नाइट्रोजन व फास्फोरस की कमी से रासायनिक खादों की जरूरत बढ़ी है। यहां पोटाश की मात्रा अन्य जनपदों की तुलना में बेहतर है।

जनपद में तीन चरण में मिट्टी के 11459 नमूने संकलित किये गये थे। इन्हे परीक्षण के लिए कृषि प्रयोगशाला भेजा गया। कृषि उप निदेशक जी सी कटियार ने बताया कि अब तक लगभग साढ़े हजार नमूनों की रिपोर्ट आ चुकी है। इनमें से ज्यादातर में नाइट्रोजन व फास्फोरस की कमी पायी गयी है। नाइट्रोजन की कमी से पौधे की वृद्धि प्रभावित होती है। इसे संतुलित वृद्धि देने के लिए पर्याप्त मात्रा में यूरिया डालना आवश्यक है। इसी तरह फास्फोरस की कमी से पौधों की फली का सम्यक विकास नहीं होता। भूमि की उर्वरा शक्ति में आयी इन रासायनिक तत्वों की कमी को रासायनिक खादों के साथ ही जैविक खाद से भी पूरा किया जा सकता है। प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में फिर भी यहां की मिट्टी ठीक है। कारण सभी जगह पोटाश की कमी है जो यहां की मिट्टी में प्रचुरता में है। उप निदेशक के अनुसार इन रासायनिक तत्वों की कमी के बाद भी यहां की मिट्टी की उत्पादन क्षमता दूसरे जिलों से बेहतर है।

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