मिट्टी पहचानो अभियान नहीं चढ़ सका परवान

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झांसी- रबी फसल में कृषि उत्पादन में बढ़ोत्तरी हेतु मृदा स्वास्थ्य सुधारने की कवायद के तहत चलाए गए अपनी मिट्टी पहचानो अभियान में मण्डल में खेतों से मात्र 12,750 नमूने ही भरे जा सके। अभी इनकी रिपोर्ट आना बाकी है, किन्तु विशेषज्ञ लगातार पोषक तत्वों की कमी से चिन्तित है।

अधिकाधिक उपज लेने के लिए मण्डल में 30 सितम्बर, 9 व 14 अक्टूबर को खेत की मिट्टी के नमूने ले कर पोषक तत्वों के परीक्षण हेतु प्रयोगशाला तक पहुंचाने का अभियान चलाया गया था। इसके तहत झासी में 4807, ललितपुर में 4375, जालौन में 3568 नमूने भरे गए। हालाकि यह लक्ष्य से बहुत कम रहे। इसे पीछे सहायक निदेशक मृदा परीक्षण व कल्चर समर बहादुर सिंह ने विलम्ब से हुई वर्षा को निरूपित करते हुए बताया कि मिट्टी के गीले होने से नमूने लेने में परेशानी हुई। सिंह ने बताया कि नमूनों की टेस्टिग की जानी है, किन्तु खरीफ में चले अभियान में नमूनों के परीक्षण का जो निष्कर्ष निकला था लगभग वही इस बार भी निकलेगा क्योंकि मिट्टी जल्दी परिवर्तित नहीं होती। मण्डल में जीवाश कार्बन 0.2 से 03 प्रतिशत के मध्य है जबकि इसे 0.8 प्रतिशत रहना चाहिए। फास्फेट अति न्यून श्रेणी में है और जिंक व सल्फर की भी मात्रा कम होती जा रही है। यह तत्व न केवल अनाज के दानों में चमक व वजन लाते है बल्कि उनमें रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता भी विकसित करते हैं और इसी से हमारा स्वास्थ्य जुड़ा हुआ है।

सिंह ने बताया कि स्थिति को देखते हुए खेतों में जीवाश की मात्रा को बढ़ाने के लिए गोबर की हरी व कम्पोस्ट खादों का प्रयोग करना जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मशीनों से फसलों की कटाई से वैसे ही तमाम सूक्ष्म तत्व नष्ट हो जाते है। उधर, खेत में बचे अवशेषों को मिट्टी में जोतने के बजाए कृषक जला देते है जिससे फसल के उत्पादन में सहयोगी भूमिका निभाने वाले सूक्ष्म जीवाणु भी नष्ट हो रहे है।