मानव सेवा की नहीं तो सार नहीं जीने में

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श्रीनगर- साहित्यकार कल्याण संस्था व श्री दुर्गा समिति के तत्वाधान में ऐतिहासिक श्रीनगर दुर्ग में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न कवियों ने अपनी कविताएं प्रस्तुत की।

नवरात्र पर्व पर आयोजित कवि सम्मेलन का आयोजन आचार्य श्रीराम सोनी ने वाणी वंदना प्रस्तुत कर किया। उन्होंने शहीदों पर कविता पढ़ते हुये कहा कि तेरा वक्ष छलनी करूंगी अपने ही हाथों पर निज दूध को न कभी भी लजाऊंगी। बैजनाथ वर्मा रसरंग ने राष्ट्रीय एकता पर बल देते हुये कहा कि चमन की बात करते है , हमारा देश मंदिर है, हमारा देश मस्जिद है, अमन के हम पुजारी है अमन की बात करते है। मनोज कुमार मधुर ने चाहे जाओ मथुरा काशी चाहे जाओ मदीने में, मानव सेवा किया नहीं तो सार नहीं है जीने में। पंक्तियां प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। इस अवसर पर अनिल रावत, पं जगप्रसाद तिवारी, शिवनाथ त्रिपाठी शंख आदि ने भी अपनी रचनाओं ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बैजनाथ वर्मा रसरंग व संचालन शिवनाथ त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम में नवल किशोर सोनी को साल व श्रीफल देकर सम्मानित किया गया।