मां होती है सबसे पहली गुरु

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चित्रकूट- भगवान राम की कर्मस्थली में सवा पांच करोड़ महारुद्रों का निर्माण कराने जा रहे आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री ‘दद्दा जी’ का कहना है कि अपने गुरु को दिये गये महासंकल्प का समापन साधना की इस अनोखी स्थली से हो गया। उन्होंने गुरु पूजन की श्रंखला के निपटने के बाद भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि कल से वे अपने गुरु को दिये वायदे को पूरा कर पाने की दिशा में आगे बढ़ जायेंगे। वैसे तो गुरु के ऋण से कोई कभी मुक्त हो नहीं सकता पर पैंतालीसवां महारुद्र निर्माण महायज्ञ उनके जीवन को सर्वाधिक प्रसन्नता देने वाला सिद्ध होगा। गुरु के महत्व को शब्दों में परिभाषित करते हुये कहा कि किसी भी व्यक्ति की सबसे पहली गुरु उसकी मां होती है, क्योंकि जन्म के बाद वही उसे दीक्षा देकर सांसारिक जीवन जीने को दीक्षित करती है। माता व पिता से बड़ा गुरु हो ही नहीं सकता। उन्होंने गणेश जी का दृष्टांत बताते हुये कहा कि उन्होंने मां और पिता की परिक्रमा करके ही पूरी सृष्टि की परिक्रमा को चरितार्थ कर कार्तिकेय जी पर विजय प्राप्त कर बाबा भोले और मां पार्वती से मुहर भी लगवा ली थी। इस दौरान बाहर के प्रांतों से आये आचार्य जी के हजारों शिष्य भी मौजूद रहे।

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