महासंग्राम 2017 : विकास कार्य एक बड़ा मुद्दा

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झांसी: विधानसभा चुनाव में इस बार विकास कार्य एक बड़ा मुद्दा बन सकते हैं। खासतौर पर वे काम जो शुरू तो हुए मगर समय पर पूरे नहीं हो सके। कभी बजट कमी तो कभी सिस्टम की सुस्ती विकास कार्यों पर भारी पड़ी और इसका लाभ जिले को नहीं मिल सका। अब गेंद पब्लिक के पाले में है। विधानसभा चुनाव नतीजों पर इसका असर पड़ सकता है।

2012 में प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जिले के विकास की कई घोषणाएं की थीं, लेकिन इनमें से कुछ ही धरातल पर मूर्त रूप ले पाई हैं। काम की तय अवधि पूरी होने के बाद भी विकास की कई परियोजनाएं अब भी अधूरी ही हैं। इसके अलावा 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने पर लोगों को जिले के तेजी से विकास की उम्मीद जगी थी, लेकिन झांसी और आसपास जिलों को इसका लाभ अभी तक नहीं मिल सका। केंद्र सरकार ने पर्यटन विकास का खाका खींचा था। कुछ काम शुरू भी हुआ लेकिन बीच में ही ठप हो गया।
अब विधानसभा चुनाव में एक बार फिर राजनैतिक दल विकास के दावे और वादों के साथ जनता के बीच जाएंगे। उन्हें जनता को अब तक विकास की रिपोर्ट भी देनी होगी। ऐसे में अधूरे विकास पर सफाई देना नेताओं के लिए आसान नहीं होगा। सवाल तो खड़े होंगे और इसका जवाब उम्मीदवारों के साथ राजनीतिक दलों को भी देना होगा।