महाविद्यालय न होने से घर बैठ जाते छात्र

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कुलपहाड-शिक्षा को ज्ञान की कुंजी है। व्यक्ति शिक्षित होगा भविष्य की दिशा बेहतर होगी लेकिन कुलपहाड़ तहसील में उच्च शिक्षा का कोई पुरसाहाल नहीं है।

बुंदेलखंड की सबसे बड़ी तहसील होने के बावजूद यहां अभी तक उच्च शिक्षा मुहैया कराने की सुध किसी भी सरकार या जनप्रतिनिधि ने नहीं ली। यहां न तो अभी तक न तो कोई डिग्री कालेज खोला गया है और न ही तकनीकी संस्थान हैं। भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में राठ में महिला डिग्री कालेज खोलने की घोषणा की थी लेकिन वह भी हवा-हवाई हो गया। यहां कोई डिग्री कालेज न होने से 80 प्रतिशत छात्र छात्राएं इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने के बाद उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते है। क्योंकि उनके अभिभावकों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि वह उनको बाहर भेज सकें। पालीटेक्निक व आईटीआई जैसे तकनीकी कालेज न होने के कारण नगर में रोजमर्रा के काम आने वाले जानकारों का भी टोटा है। यदि उच्च शिक्षा के प्रति यही उपेक्षा रही तो तय है कि कम से कम गरीब व मध्यम वर्ग का व्यक्ति बच्चे को शिक्षा दिलाने से वंचित हो जायेगा। अभिभावकों ने यहां डिग्री कालेज व तकनीकी कालेज खोले जाने की मांग की है।