महाराजा मर्दन सिंह का त्याग और बलिदान अविस्मरणीय

0
373

ललितपुर- झासी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ सन 1857 की क्रान्ति में उनका साथ देने वाले बानपुर नरेश महाराजा मर्दन सिंह ने पूरे बुन्देलखण्ड में उस स्वतंत्रता आन्दोलन की अगुवाई कर पूरे देश में इस क्षेत्र का डका बजाया। उनके असीम त्याग और बलिदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता है।

उक्त विचार स्थानीय विकासखण्ड सभागार में आयोजित महाराजा मर्दन सिंह की 207 वीं जयंती समारोह के मुख्य अतिथि केन्द्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने व्यक्त किये।

मुख्य अतिथि ने कहा कि इतिहास पुरुष महाराजा मर्दन सिंह सरीखे अनेकों स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान से ही हमें स्वतंत्रता प्राप्त हुई है। उनके सम्मान में इस तरह के आयोजन करने से समाज में चेतना और जागृति पैदा होती है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि नगर पंचायत अध्यक्ष मुक्ता सोनी ने कहा कि महाराजा मर्दन सिंह की इतिहास गाथा के कारण तालबेहट का नाम बुन्देलखण्ड में ही नहीं अपितु पूरे देश में जाना जाता है। उन्होंने इस ऐतिहासिक नगरी को पर्यटन विकास के क्षेत्र से जोड़े जाने की माग की। नेहरू महाविद्यालय के इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. बिहारी लाल बबेले ने महाराजा मर्दन सिंह के विभिन्न संस्मरणों पर विस्तार से प्रकाश डाला और उन पर शोध कराये जाने की माग की। जिले के वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र नारायण शर्मा ने भी ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती देने वाले महाराजा मर्दन सिंह को एक वीर योद्धा व सच्चा सिपाही बताया।

सभा को रामेश्वर प्रसाद शुक्ला, पं. बाबूलाल द्विवेदी, किशोरी शरण लिटौरिया, रामसेवक देवलिया, शशिभूषण संज्ञा जीतू आदि ने सम्बोधित किया। इस मौके पर महाराजा मर्दन सिंह के वंशज प्रपौत्र कुंवर गोविन्द सिंह जूदेव व मर्दन सिंह के प्रमुख तोपची दलेल खा के वंशज रफीक खान व मर्दन सिंह के प्रधान सेनापति मिन्ने वाल्मीकि के वंशज हरीकृष्ण वाल्मीकि को सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में प्रदीप त्रिपाठी, रामराजा बुन्देला, पी.डी. बट्टा, मनोहरनायक, सुभाष जायसवाल, जसपाल बंटी, विजय किशोर सोनी आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी छोटेलाल तिवारी व संचालन विनोद कुमार अवस्थी ने किया।