महाकुंभ: डूबती सांस को बचाएगी जल पुलिस

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हरिद्वार। पुण्य की चाह में गंगा स्नान को आने वाले श्रद्धालुओं को अब डूबने का खतरा नहीं होगा। महाकुंभ स्नानार्थियों की सुरक्षा के लिए चार सौ जल पुलिस जवान व गोताखोर तैनात रहेंगे। हरकी पैड़ी सहित महत्वपूर्ण स्नान घाटों पर राउंड द क्लाक नजर रहेगी। पुलिस को इसके लिए जरूरी आधुनिक उपकरण मुहैया कराए गए हैं।

महाकुंभ में खतरा केवल असामाजिक तत्वों का ही नहीं है, बल्कि गंगा स्नान को आने वाले श्रद्धालुओं के असावधानी के कारण डूबने का खतरा भी रहता है। स्नान के समय लोग गंगा में काफी आगे निकल जाते हैं। नतीजतन पुण्य की चाह में गंगा स्नान करने वाले श्रद्धालु कभी-कभी गंगा की असीम गहराइयों में समा जाते हैं। पिछले स्नान पर्वो के आंकड़े गवाह हैं कि अक्सर इस प्रकार की घटनाएं होती हैं। बहरहाल, महाकुंभ में डूबने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए इस बार मेला प्रशासन ने व्यापक स्तर पर तैयारी की है। प्रशासन का आकलन है कि इस बार करीब पांच करोड़ श्रद्धालु गंगा स्नान को आएंगे, जिसे देखते हुए महाकुंभ के लिए करीब चार सौ जल पुलिस जवानों व गोताखोरों की तैनाती की गई है। पहला स्नान 14 जनवरी को है और जल पुलिस के जवान यहां पहुंच चुके हैं। जिन घाटों में श्रद्धालु ज्यादा संख्या में स्नान को आएंगे वहां अधिक जवान तैनात रहेंगे। प्रत्येक घाट के लिए अलग टीम बनाई गई है और हर टीम में 12 जवान रहेंगे। जल पुलिस को जरूरी संसाधन मुहैया करा दिये गये हैं। महाकुंभ में पहली बार इतनी बड़ी तादाद में गोताखोर व जल पुलिस के जवानों की तैनाती की गई है। इन गोताखोर को 18 बोट भी दी गई हैं। जिन मुख्य घाटों पर विशेष रूप से जल पुलिस व गोताखोर के जवान तैनात रहेंगे, उनमें हरकी पैड़ी कुशावर्त घाट, वीआईपी घाट, बिरला घाट, प्रेम आश्रम घाट, सिंहद्वार घाट, पुल जटवाड़ा घाट शामिल है। कुंभ मेला डीआईजी आलोक कुमार शर्मा ने बताया कि डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस ने तैयारी की है। जल पुलिस व गोताखोर के सभी जवान उत्तराखंड के ही हैं। इन जवानों में पीएसी के तैराक भी हैं।

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