महंगाई ने तोड़ सबकी कमर

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चित्रकूट- लोकसभा चुनाव बाद बढ़ी महंगाई ने आम परिवारों के बजट ही बिगाड़ दिया। महंगाई में हुयी बेतहाशा वृद्धि पर सभी वर्ग के परिवारों पर बुरा असर पड़ा है। रोजमर्रा की वस्तुओं ने अब तक के सभी रिकार्ड पार कर लिये है। सबसे बुरा हाल गरीब तबके के परिवारों का है। जिन्हे दो वक्त की रोटी जुटाने में दिक्कत आ रही है। चूल्हे की ठंडी पड़ती आग से गरीब कराह उठा है।

लोकसभा चुनाव बाद गठित सरकार से लोगों को उम्मीदें बंधी थी कि बेकाबू होती महंगाई पर नवगठित सरकार नकेल डाल सकेगी लेकिन लोगों की आशाओं पर तुषारापात हो गया। घटती मुद्रा स्फीति की दरों के साथ महंगाई ने आम-अवाम की कमर तोड़ दी है।

हाथ ठेला चला रहे मजदूर भगवान दीन का कहना है कि पचास बसंत देख चुकने के बाद ऐसी महंगाई नहीं आयी। इसी तरह रिक्शा चालक अवधेश भी यही कहता है कि चीजों के दामों के बढ़ने से अब परिवार को दोनो वक्त का भोजन नसीब होना कठिन हो गया है। समाज सेवी चंद्रशेखर मिश्रा कीमतों के उछाल पर  कहते है कि गत वर्ष की अपेक्षा अरहर की दाल 40 रुपये प्रति किलो के बजाये 90 रुपये किलो हो गयी, सरसों का तेल 70 से 80 रुपये किलो, वनस्पति घी 50 से 65 रुपये, मूंगदाल 32 से 52 रुपये सहित दैनिक उपभोग व खानपान की चीजों पर महंगाई बाढ़ की तरह आयी है।

सब्जी विक्रेता के अनुसार सब्जी की बढ़ी कीमतों से साधारण परिवारों ने खरीददारी से लगभग तौबा कर ली है। आलू 18 रुपये किलो, टमाटर 40 रुपये, पालक 20, भिंडी 30, लौकी कद्दू 18 से 20, घुइंया 20, बैगन 15, तरोई 30 रुपये किलो है जो अब तक की सबसे महंगी सब्जियों में है। इसी तरह आम 50 रुपये प्रति किलो, अनार 60, सेव 100 रुपये किलो होने से साधारण परिवार के तीमारदार बीमारी से ग्रस्त लोगों को खिलाने से परहेज कर लिये है।

आसमान छूती कीमतों पर गृहणियों का कहना है कि महीने के सीमित बजट पर आश्रित गृहस्थी का ढांचा बिगड़ गया है। जिस बजट पर महीने भर के सभी खर्च समायोजित हो जाते थे अब उन्हीं खर्चो पर कटौती करनी पड़ रही है। चटपटे खानपान का दायरा सिमटाने को मजबूर है। बच्चों की शिक्षा पर आनेवाले खर्च पूरा करने में अन्य बाहरी कामों को रोकना पड़ा है। ये मानती है कि महंगाई की मार से सभी वर्ग के परिवार प्रभावित है।

महंगाई ने गरीबों के घरों के चूल्हे बुझाने में पानी का काम किया है। मेहनतकश मजदूर, मानदेय कर्मी दाल-रोटी या फिर साधारण भोजन कर दिन गुजारने को विवश हो गये है।   वस्तुओं की बढ़ी कीमतों की मार से गरीब व मध्यम वर्गीय परिवार आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे है। महंगाई पर काबू करने के लिये सरकारों को एहतियाती कदम उठाने चाहिये।