मन्त्राी का आदेश भी बेकार है ग्राम प्रधान के लिए

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पात्रा होने के बावजूद भी भटक रहा है रोजगार सेवक की नियुक्ति के लिए
छोटी से नौकरी के लिए भी मांगी जा रही है सुविधा शुल्क

भइया ! अपना-अपना अधिकार है। तभी तो मन्त्राी व उच्चाधिकारियों का आदेश भी उनके लिए बेकार है। और गांव का एक बेरोजगार युवक छोटी सी नौकरी के लिए उनके चक्कर काट रहा है और सुविधा शुल्क न देने के कारण उसे नौकरी नहीं मिल रही। जबकि उसके पक्ष में मन्त्राी और अधिकारियों ने भी सम्बंधितों को उचित कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं।

तहसील कर्वी अन्तर्गत पुरवा तरौहां गांव निवासी उमाकान्त पाण्डेय पुत्रा राजनारायण पाण्डेय एक शिक्षित बेरोजगार युवक है। उसने बताया कि अक्टूबर 09 में सीडीओ कार्यालय से जारी विज्ञापन के आधार पर उसने अपने गांव में ग्राम रोजगार सेवक के पद पर नियुक्ति के लिए इस उम्मीद से आवेदन किया था कि उसे नौकरी मिल जाएगी और वह भी कुछ कमा कर अपने परिवार का सहयोग कर सकेगा। परन्तु उसकी उम्मीदों पर पानी उस समय फिर गया जब ग्राम प्रधान शिवनरेश अवस्थी अपने सगे सम्बंधी को  नौकरी में रखने के चक्कर में उसे टरकाने लगा और बार-बार चक्कर लगाने के बाद भी उसे नहीं नियुक्त किया गया। जबकि अभी तक रोजगार सेवक का पद खाली पड़ा है जिसके चलते गांव में मनरेगा के उद्देश्यों की पूर्ति भी नहीं हो पा रही है। उधर उमाकान्त का भाई रमाकान्त जो एनएसयूआई का नेता है उसने बताया कि जब उसने अपने भाई को नौकरी दिलाने का प्रयास किया तो ग्राम प्रधान व सचिव रमाशंकर साहू ने अपने आदमियों के मार्फत उससे इस छोटी सी नौकरी के बदले सुविधा शुल्क की मांग की। जबकि उसका भाई इस पद के लिए पूरी अहZता रखता है इसके बाद भी ग्राम प्रधान व सचिव मनमानी करते हुए उसकी नियुक्ति नहीं कर रहे हैं। रमाकान्त ने बताया कि प्रधान व सचिव की मनमानी से परेशान हो उसके भाई ने जिलाधिकारी व ग्राम्य विकास मन्त्राी दद्दू प्रसाद को ग्राम पंचायत सदस्यों के सहमति प्रमाणपत्राों सहित प्रार्थना पत्रा देकर न्याय की गुहार लगाई तो जिलाधिकारी ने सीडीओ को जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। जबकि ग्राम्य विकास मन्त्राी दद्दू प्रसाद ने तो सीडीओ को जांच कर उसकी नियुक्ति कराने के स्पष्ट निर्देश दिए। इसके बावजूद भी ग्राम प्रधान ने उसकी नियुक्ति नहीं की। बेरोजगार युवक उमाकान्त का कहना है कि ग्राम प्रधान का कहना है कि वह न तो ग्राम्य विकास मन्त्राी और न ही जिलाधिकारी का आदेश मानेगा। जिसके कारण उसे नौकरी नहीं मिल पा रही है। उसने उच्चाधिकारियों से न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। उधर जब इस सम्बंध में ग्रामप्रधान से संपर्क करने की कोशिश किए जाने पर न तो वह ही मिला और न ही उसका मोबाइल। जबकि सचिव रमाशंकर साहू ने बताया कि उनके पास कई ग्राम पंचायतों का कार्य है। रोजगार सेवक की नियुक्ति के बारे में कहा कि गंाव में अभी तक किसी भी प्रकार की नियुक्ति नहीं कीगई है। जब उससे पूछा गया कि शासन के सख्त आदेश और विज्ञापन निकलने के बाद भी रोजगार सेवक की नियुक्ति अधर में लटकने का क्या कारण है तो उसने बताया कि ग्राम प्रधान ने अपने स्तर से नियुक्ति की तैयारी की है और उसे ज्यादा कुछ नहीं मालूम।