मध्यप्रदेश में सरकार का बोलबाला, संघ सहित दिग्गजों की अनदेखी

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भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आरएसएस नरेंद्र तोमर और कैलाश विजयवर्गीय को बलाये ताक पर रख कर यह साबित कर दिया की मप्र में सिर्फ शिवराज ही शिवराज चलेगा।
आज जारी हुई निगम मंडल के पदाधिकारियों की नियुक्तियों ने यह साफ कर दिया। इंदौर और ग्वालियर संभाग के नेता पूरी तरह से साफ़ वही संघ के दिग्गजों की सिफारिश भी कचरे की टोकरी में डाली गई ऐसा लग रहा है ।
निगम मंडल की सूची आने के बाद संघ से जुड़े सूत्रों से मिली जानकरी के अनुसार संघ के कई प्रचारक नाराज है।
वही बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और शिवराज के खासमखास केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर के समर्थक भी खास नाराज है।

बीजेपी के इन दोनों दिग्गजों के क्षेत्र और समर्थकों की इस लिस्ट में जमकर अनदेखी हुई है। इतना ही नही बीजेपी ने इस सूची में अपनी ही गाइड लाइन का उल्लंघन किया है

तीन बार चेयरमैन रहे नेताओं को रिपीट किया गया, मुख्यमंत्री ने अपने विधानसभा क्षेत्र को वरीयता दी और बुधनी के अपने चार समर्थक, शिव चौबे, गुरु प्रसाद शर्मा,रामकिशन चौहान,राजेन्द्र सिंह राजपूत मंत्री का दर्जा दिला कर अपनी ताकत दिखाई।

पहली बार ऐसा हुआ है कि संगठन मंत्रीयो को चेयरमैन बनाया गया। तपन भौमिक और सुरेश आर्य को चेयरमैन बना कर बीजेपी ने अपनी नियमावली तोड़कर संगठन में शिवराज सिंह चौहान ने अपनी ताकत दिखा दी।

कभी प्रभात झा के खास रहे मीडिया गुरु हितेश वाजपेयी का जादू मप्र के प्रभारी विनय सहस्त्र बुद्धे के सिर पर भी चढ़ कर बोल गया और शिवराज सिंह को विनय जी को खुश करने के लिए हितेश बाजपेयी को नागरिक आपूर्ति निगम का चेयरमैन बनाना पड़ा।

कुल मिलाकर बीजेपी में अब नेताओं की दुकान बंद मैनेजमेंट का कारोबार शुरू हो गया निगम मंडल की सूची देखकर कुछ ऐसा ही प्रतीत हो रहा है।