मतदान कर बने इक्कीसवीं सदी के भारत का हिस्सा

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महोबा। भय, लोभ, जातीय मोह और साम्प्रदायिक सोच को त्याग विकासोन्मुख, सक्रिय, समझदार व जनसेवा में समर्पित प्रत्याशी का चयन करे। याद रखे कि आप की लापरवाही और आलस्य आगे पांच साल के लिए समस्या खड़ी कर सकता है। इक्कीसवीं सदी के भारत का हिस्सा बनना है तो बुनियादी जन सुविधाएं हासिल करने की ललक है तो बुद्धिमानी से मतदान कर राष्ट्र के प्रति अपना दायित्व निभाएं।

यह बात करहरा डांग गांव में मतदाता जागरूकता शिविर को संबोधित करते हुए अरूणोदय संस्थान के निदेशक अभिषेक मिश्रा ने कही। अखिल भारतीय जनचेतना मंच, जी न्यूज, चिंगारी संगठन आदि के संयुक्त तत्वाधान में जिले के गांव- गांव में ऐसे शिविर का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के संगठन सदस्य राकेश दुबे ने कहा कि पचास साल की प्रजातांत्रिक यात्रा में अहम बदलाव आये है। आजादी के बाद के कई चुनावों में जो लोग वोट नहीं डाल पाते थे वह अब बढ़ चढ़कर मतदान करते है। इसके विपरीत उस दौरान जो लोग सक्रिय रहते थे उनमें अरुचि पैदा हो गयी। मतदान के प्रति नकारात्मक सोच ने अपराधियों, दबंगों का दखल बढ़ा दिया है। रेखा जी ने बताया कि मतदान न करना अपने आप में राष्ट्रीय कर्तव्य से विमुख होना है। नेहा चौरसिया ने कहा अधिकतम मतदान करके ही लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। प्यारे लाल व गोपाल कृष्ण ने ग्रामीणों से अपनी समस्याओं से जुड़ी स्थानीय घोषणा पत्र बना सभी प्रत्याशियों से उसके संदर्भ में चर्चा करने की सलाह दी। संचालक अभिषेक मिश्रा ने बताया कि मतदाता जागरूकता का यह वृहद अभियान जनपद के चारों विकास खंडों में एक साथ चलाया जा रहा है। प्रयास है कि कोई गांव छूटने न पाये।