मकर संक्रांति: 1033 साल बाद आयेगा ऐसा योग…

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मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और कंकण सूर्य ग्रहण इस बार एक ही दिन पड़ रहे हैं। मकर संक्रांति पर्व 14 जनवरी से प्रारंभ होकर 15 जनवरी सुबह 5 बजे तक है। वहीं 14 जनवरी को सुबह 10:11 बजे से मौनी अमावस्या शुरू हो जाएगी, जो 15 जनवरी को दोपहर 12.41 बजे तक रहेगी। तीनों पर्व का योग करीब एक हजार साल बाद बन रहा है। 15 जनवरी को कंकण संक्रांति भी है। इन तीनों का योग और कंकण सूर्य ग्रहण शुक्रवार को पड़ने तथा अन्य ग्रह के वक्री चलने से एक माह के भीतर तेज हवा के साथ वर्षा और ओले गिरने की संभावना है। 15 जनवरी को तीनों का यह दुर्लभ योग एक हजार साल बाद बन रहा है। इसके बाद अगला योग 1033 साल बाद यानी 24 दिसंबर 3043 को पड़ेगा। पितृदोष शांति तथा तंत्र, मंत्र की सिद्धि के लिए भी यह दिन अति महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। आमतौर पर मकर संक्रांति तथा मौनी अमावस्या में लगभग एक पखवारे का अंतर होता रहा है, लेकिन इस बार दोनों का योग साथ-साथ है। यह योग 20 साल बाद आया है पिछला योग 14 जनवरी 1990 को था। अब दोनों का अगला योग 14 जनवरी 2028 को बनेगा। संयोग से इसी दिन कंकण सूर्य ग्रहण भी पड़ रहा है। ये तीनों एक हजार साल बाद एक ही दिन पड़ रहे हैं। खगोल शास्त्रियों के लिए यह दिन काफी महत्वपूर्ण रहता है, इस दिन तीनों के योग से वातावरण पर असर डालने वाले तत्वों पर वे शोध करते हैं। ज्योतिषाचार्य विजय भूषण वेदार्थी ने बताया कि कंकण सूर्य ग्रहण के लिए ग्वालियर-चंबल संभाग में सूतक 14 जनवरी की रात्रि 11 बजे लग जाएगा। ग्वालियर में सूर्य ग्रहण का स्पर्श 15 जनवरी की सुबह 11:50 बजे और मोक्ष दोपहर 3:14 बजे होगा। परम ग्रास 59 प्रतिशत होगा। यह ग्रहण उत्तराषाढ़ नक्षत्र एवं मकर राशि में घटित होने के कारण इस नक्षत्र एवं मकर राशि वाले व्यक्तियों को विशेष कष्टकारक रहेगा।

ज्योतिर्विद का कहना है कि यूं तो हर माह सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है और इस प्रवेश के समय को संक्रमण काल कहते हैं। इसी से संक्रांति शब्द बना है। कर्क, तुला और मकर तीन बड़ी संक्रांति होती है जिसमें मकर संक्रांति सबसे महत्वपूर्ण है। इस बार 14 जनवरी को सूर्य दोपहर 12:36 बजे मकर राशि में संक्रमण कर रहा है। निर्णय सिंधु में कहा गया है कि यदि दिन में सूर्य मकर राशि में प्रवेश करे तो पूरा दिन और 16 घंटे तक मकर संक्रांति का पर्व काल रहता है।

ज्योतिर्विद का कहना है कि 22 जुलाई 2009 को सदी का सबसे बड़ा पूर्ण सूर्य ग्रहण था। इसके सात माह बाद ही 15 जनवरी को इसी सदी का सबसे बड़ा कंकण सूर्य ग्रहण होने जा रहा है। इसके बाद इतना लंबा कंकण सूर्य ग्रहण 1033 वर्ष बाद यानी 24 दिसंबर 3043 को दिखाई देगा।

Vikas Sharma
bundelkhandlive.com
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