मंदाकिनी बचाने को फिर शुरू होगा अभियान

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मंदाकिनी को प्रदूषण से बचाने के काम में लगे गायत्री परिवार व दीन दयाल शोध संस्थान ने एक बार फिर आंदोलन को धार देने का मन बनाया है। आंदोलन से जुड़े लोग देवी प्रतिमाओं को नदी में विसर्जन न करने को लेकर जल्द ही प्रशासन के साथ दुर्गा पूजा समितियों और साधु संतों के साथ बैठक करने वाले हैं।

गौरतलब है जून में मंदाकिनी को पुनर्जीवन देने के उद्देश्य से मंदाकिनी शुद्धि आंदोलन को खड़ा करने का काम गायत्री परिवार, दीन दयाल शोध संस्थान के साथ ही ब्राह्मण सभा ने किया था। इस आंदोलन में जहां एक तरफ स्वामी रामभद्राचार्य ने अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई थी वहीं गंगा नदी की लड़ाई लड़ने में अग्रणी रहे पर्यावरण विद् प्रो. जी डी अग्रवाल ने भी अपना सहयोग दिया था। लोगों की पहल का नतीजा काफी सकारात्मक रूप में सामने आया। जहां मप्र के इलाके में जेसीबी से मंदाकिनी नदी के अंदर की मिट्टी हटायी गयी वहीं सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंगों को भी मंदाकिनी में नहीं विसर्जित किया गया। आंदोलन के अगुवा गायत्री परिवार के रामनारायण त्रिपाठी ने कहा कि अब फिर से आंदोलन में जान फूंकने का समय आ गया है। वे दुर्गा कमेटी के साथ ही प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, साधु संतों और समाजसेवियों के सहयोग से दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन मंदाकिनी में रोकने को सबकी राय से मसौदा तय करेंगे। समाजसेवी अजय रिछारिया कहते हैं कि मंदाकिनी में मूर्तियों का विसर्जन रोकने के लिए जल्द ही बैठक बुलाई जायेगी। दीन दयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव डा. भरत पाठक ने कहा कि मंदाकिनी में मूर्तियों का विर्सजन न हो इसके लिए वे सतना व चित्रकूट जिले के अधिकारियों से बात करेंगे।