भू-विसर्जन के लिए पंडालों में पहुंचीं महिलाएं

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चित्रकूट- मंदाकिनी नदी में देवी मूर्तियों का विसर्जन रोकने को लेकर आगे आये गायत्री परिवार के साथ ही पतंजलि योग समिति से जुड़ी महिलाओं की टोलियों ने मंगलवार को मुख्यालय के देवी पंडालों पहुंचकर आयोजकों को मूर्तियों का भूविर्सजन करने की सलाह दी।

गायत्री परिवार की सुधा तिवारी व पतंजलि योग समिति की जिलाध्यक्ष मंजू केसरवानी के नेतृत्व में शहर में निकली लगभग सौ महिलायें लोगों के बीच मंदाकिनी को निर्मल बनाने के लिये जनजागरण कर रही थी। ढपली बजाती महिलाओं ने देवी पूजा पंडालों में पहुंचकर समितियों के सदस्यों से मूर्तियों का विसर्जन मंदाकिनी में न कर भूविसर्जन करने की बात कही। कला नयन दुर्गा पूजा पंडाल के सामने गायत्री परिवार की सुधा तिवारी ने कहा कि एक मां के पार्थिव शरीर को दूसरी मां मंदाकिनी के हृदय पर न डाला जाये। आज पानी की कमी के कारण पावन सलिला मंदाकिनी खुद ही चीत्कार कर रही है। इसको बचाने का काम सभी नवयुवकों को मिलकर करना होगा। पतंजलि योग समिति की मंजू केसरवानी ने कहा जब पूरे विश्व में जल का संकट सामने आ चुका है और इसी तरह से नदियों में पूजा सामग्री व मूर्तियां डालने से तो वे पट जायेगी फिर पीने का पानी कहां से आयेगा? नये विकल्प के रूप में मूर्तियों का भूविर्सजन अब समय की मांग के अनुसार अपनाया जा सकता है। इसके अलावा अगर कोई दूसरे विकल्प हों तो पंडालों के संचालक विचार करके सामने रखें।

गायत्री परिवार की विमला सिंह व पुष्पा शर्मा ने कहा कि जब पूरा हिंदू समाज एक ही धर्म में पिरोया हुआ है तो फिर फतेहपुर और महाराष्ट्र की तर्ज पर यहां पर भी बदलाव क्यों नही हो सकता। फिर जब भू विसर्जन को तो देश के प्रमुख संत और महात्माओं ने इसे वैदिक रीति से सही करार दिया है। महिलाओं की यह टोली शंकर बाजार की शंकर नयन, महाकाली दुर्गा पूजा समिति, बजरंग सेवा दल, शंकर बाजार दुर्गा पूजा समिति सहित अन्य देवी पंडालों में जाकर अपने विचारों को लोगों तक पहुंचाया। इस टोली में विशेष रूप से उमा तिवारी, विमला गुप्ता, रत्ना गुप्ता, सविता तिवारी आदि सहित एक सैकड़ा महिलाएं शामिल रहीं।