भारतीय संस्कृति को अपनाने से ही कल्याण

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युवा वर्ग का भारतीय संस्कृति अपनाने से ही कल्याण है। आधुनिक पीढ़ी को पाश्चात्य सभ्यता अपनाने की जरूरत नहीं है। भारतीय संस्कृति ही विश्व संस्कृति है। युवा लक्ष्य के प्रति सदैव सचेत रहकर ही सफलता प्राप्त कर सकते है। यह संदेश गायत्री प्रज्ञा संस्थान दर्शन धर्म जागरण एवं प्रबुद्ध वर्ग गोष्ठी में मौजूद विद्वानों ने युवाओं को दिया।

मंगलवार को मुख्यालय के चित्रकूट इंटर कालेज के प्रांगण में आयोजित गायत्री प्रज्ञा संस्थान की प्रबुद्ध वर्ग गोष्ठी में शिकागो अमेरिका से आई कुसुम बेन पटेल ने युवा शक्ति को अपनी ताकत पहचानकर विश्व में नाम रोशन करने का आह्वान किया। आतंकवाद, नस्लवाद, भाई भतीजावाद व जातिवाद को विकास की गति में सबसे बड़ा रोड़ा बताते हुये उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति इन्हीं कारणों से रूकी पड़ी हुई है। उन्होंने अमेरिकी युवाओं का उदाहरण देते हुये कहा कि विदेशी युवा अपने लक्ष्य के प्रति सचेत रहकर कार्य कर रहे हैं। जिससे आज अमेरिका विश्व की सबसे बड़ी ताकत बन गया है। भारतीय युवाओं को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिये। विदेशियों ने हमारी संस्कृति, क्षमता व योग्यता को अपनाकर तरक्की पायी है और हम अपने मार्ग से भटक रहे हैं। गोष्ठी में मौजूद शिकागो अमेरिका के मेहमान एंड्रयू पोलास्की ने कहा कि विद्यार्थी जीवन के लक्ष्य से भटकें नहीं। जीवन में संघर्ष और कष्ट सहकर ही व्यक्ति महान बन सकता है। युवा वर्ग चाहे तो बगैर किसी सहारे के अपने जीवन में अकेले ही लक्ष्य की ओर बढ़ सकता है। जीवन का नाम संघर्ष है। गोष्ठी में रघुराज सिंह, विवेक शुक्ला, गंगा सिंह व इंद्रजीत सिंह ने भी संबोधित किया। इसके अलावा जयश्रीजोग, हरिश्चंद्र गुप्ता, रणवीर सिंह चौहान, बलवीर सिंह, शंकर लाल गुप्ता, विजय गुप्ता व विमला सिंह सहित तमाम लोग मौजूद रहे।