भयावह अहसास को भोगते हुऐ बरूआसागर की संजना ने पूरे 9 साल गुजार दिए

0
250

vlcsnap-2012-09-25-20h15m08s50खतरनाक बीमारी से जूझ रही बच्ची के माता पिता ने लोगों से मांगी मदद, कोई तो कराये इलाज गरीबी ने जिन्दगी को बना दिया अभिशाप जब उसे शौच जाने की इच्छा होती है तो उसकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। उसके माता-पिता को अपनी गरीबी पर रोना आता है। वह बीते रोज के दुखद अहसास को फिर दोहराए जाने की मजबूरी को सोचकर ही सिहर उठती है।

-राजकुमार विश्वकर्मा को बेटी का जन्म किसी देवी से कम नहीं लगा। राजकुमार जहां गांव में ही छोटी-मोटी कारपेन्टरी करता है तो उसकी पत्नी माईग्रेन की शिकार है। तंगहाली के दौर से गुजर रहे इस परिवार पर कुदरत का कहर भी पड़ गया। 15 मई 2003 को नन्ही परी ने यहां आंखें तो खोली, लेनिक पूरी तरह से उसका शारीरिक विकास नहीं हो सका, जिसने उसकी जिन्दगी को जहर बना कर रख दिया है। इस बच्ची का गुदा द्वारा बन्द जैसा है। कहने में भले ही यह बात छोटी सामान्य सी है, लेकिन जब संजना को शौचक्रिया की याद आती है तो उसके पूरे शरीर में कपकपी छूट जाती है। इस दौरान छोटी सी बच्ची को बेइंतहा तकलीफ होती है, इसका एहसास करना भी मुश्किल हे। हर रोज इस जिन्दगी के साथ गुजर कर रही संजना का खाना पीना भी बहुत कम होता है और उसकी कोशिश होती है, कि शौचक्रिया के लिए जाना ही न पड़े। यदि किसी दिन उसे दिन में दो-तीन बार शौच करना होता है तो पूरा परिवार हलाकान हो जाता है।

मगर जिन्दगी का ही एक हिस्सा बन चुके दर्द के इसी अति भयावह अहसास को भोगते हुऐ बरूआसागर की संजना ने पूरे 9 साल गुजार दिए हैं। इस बच्ची का गुदा द्वार बहुत कम खुला है, जब वह शौच करने जाती है तो मूत्रनलिका से मल बाहर आता है। जन्म के साथ मिली इस दर्दनाक विकृति से उसे मुक्ति दिलाने के बीच परिवार की तंगहाली आड़े आ रही है। हर दिन दर्द के कड़वे अहसास में छटपटाती संजना को इस पीड़ा से मुक्ति पाना चाही है, लेकिन सरकारी मेडिकल कालेज के  डाक्टरों का कहना है कि 10 हजार रूपयों में संजना का आपरेशन होगा। संजना के माता पिता कहते है कि कोई भी नेता या समाजसेवक मेरी मदद के लिए आज तक आगे नहीं आया। हमारे घर में खाने को कुछ नहीं है  संजना के  मां बाप पर इतने पैसों नहीं है की इलाज करवा सके । डाक्टरों से लेकर हर दर पर इसने दस्तक दी, लेकिन गरीबी के इस इम्तिहान में उसे जमाने में कोई हमदर्द भी नसीब नहीं हुआ। जब संजना को निजी डाक्टरों को दिखाया तो आज उसके आपरेशन में लगभग पचास हजार रूपये लगेगे दवाइयों का खर्च अलग है .अगर सम्पन्न परिवार में यदि यही बच्ची जन्मी होती तो शायद उसे परिजन तत्काल आपरेशन के माध्यम से समस्या का निराकरण करा देते। लेकिन मुफलिसी के दौर में गुजर रहे इस परिवार ने नौ साल लम्बा वक्त किस तरह निकाला यह उनका दिल ही जानता है। ऐसा नहीं कि राजकुमार ने संजना के आपरेशन के लिये कुछ नहीं किया हो। जन्म के समय ही उसने अपनी पत्नी के जेवरात और वर्तन गिरवी रखकर इलाज कराया था, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। पिछले साल मेडिकल कालेज में उसने बच्ची को ज्यादा तकलीफ होने पर भर्ती कराया तो यहां भी डा0 राजीव सिन्हा ने आपरेशन ही निदान बताया। 10,000 रूपये की व्यवस्था न कर पाने के कारण वह बच्ची को घर वापस ले आया। हर रोज दर्द में तड़पती बेटी की हालत पर जब किसी की भी मानवीय संवेदनायें नहीं जागी तो उसने नेता और अफसरों और शासन से लेकर देश के राष्टपति कार्यालय तक से अपनी बच्ची के इलाज के लिए रहत कोष से मदद मांगी मगर पिछले दो सालो से पात्राचार की हो रहा है  नतीजा वही ढाक के तीन पात ही रहा।

ज्यों-ज्यों संजना की उम्र बढ़ती जा रही है, त्यों त्यों तकलीफ भी बढ़ती जा रही है। आपरेशन की कीमत पहले जहां दस हजार रूपये थी तो अब वह भी पञ्चगुना से ज्यादा हो गई है। मगर आज संजना के माँ बाप अपनी लड़की के इलाज के लिए दुसरो पर निर्भर है साशन प्रसाशन से भरोसा उठ चुके परिवार को अब दानदाताओं का इन्तजार है। हमारा चेनल अपने दर्शको से अपील करता है की जो भी इस बच्ची संजना की मदद करना चाहता है इन नंबर पर फ़ोन कर मदद कर सकता है -07607859752 ,8546059440 .

Vikas Sharma
Editor
www.upnewslive.com ,
www.bundelkhandlive.com ,
E-mail : vikasupnews@gmail.com,
editor@bundelkhandlive.com
Ph- 09415060119