भगवान की जमीन को कर दिया दान

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भगवान के नाम वाली जमीन महंत ने दान कर दी। गुरुवार को मामले की पड़ताल के बाद अपर आयुक्त भगवान सिंह ने इस पूरे प्रकरण में दोषी लेखपाल को निलंबित करने का आदेश दिया।

भरतकूप मंदिर की जमीन को दान देने के मामले में लेखपाल देवदत्त को जहां निलंबित कर दिया गया। मंदिर की जमीन को महंत से दान लेने के बाद उस पर बालिका विद्यालय के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक से अनुदान लेने वाली स्वयं सेवी संस्था को सात लाख रुपये वापस करने के आदेश हुए हैं। धन वापस न करने पर कुर्की होगी। वहीं गलत ढंग से अनुदान देने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक, गलत प्रपत्रों में हस्ताक्षर करने के लिए पूर्व एसडीएम के खिलाफ पत्र कमिश्नर को लिखा गया। साथ ही मंदिर के महंत को मंदिर की जमीन को दान देने मामले में दोषी पाया गया।

अपर आयुक्त भगवान सिंह ने तमाम शिकायतों की जांच की तो मंदिर की जमीन दान देने के मामले में लेखपाल को गलत पत्रावली बनाने का दोषी पाया गया। वहीं मंदिर के महंत लवकुशदास को मंदिर की जमीन को दान देने के दोषी मिलने के बाद बालिका विद्यालय के जमीन दान लेने वाली संस्था ग्रामीण एवं नगरीय विकास संस्थान इलाहाबाद के सचिव राजेश सिंह को 7 लाख रुपयों के सरकारी धन का दोषी पाया गया। उन्हें सात लाख रुपये सरकारी खाते में जमा कराने के आदेश दिये गये।

तहसीलदार अश्विनी कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि वास्तव में मंदिर की जमीन भगवान भरत जी के नाम हैं। इस जमीन की देखरेख करने का अधिकार मंदिर के महंत लवकुशदास को है। अपर आयुक्त ने मंदिर के महंत, लेखपाल और पूर्व डीआईओएस व पूर्व एसडीएम के खिलाफ कार्यवाही के निर्देश दिये हैं व संस्था को दिये गये अनुदान को निरस्त कर वापस जमा कराने की कार्यवाही करने को लिखा है। धन वापसी की कार्यवाही में संस्था के सचिव की चल व अचल सम्पत्ति की कुर्की कर धनराशि जमा कराई जा सकती है। बताया कि उन्होंने लेखपाल देवदत्त को निलंबित कर अपनी आख्या जिलाधिकारी को भेज दी है।

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