भगवत नाम से मिलते हैं भगवान

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बड़ागांव गेट बाहर स्थित दूर बाबा हनुमान मन्दिर श्रीमद भागवत कथा का रसास्वादन कराते हुए अखिलेश पाठक ने कहा कि सतयुग, द्वापर एवं त्रेता युग में सैकड़ों वर्ष तपस्या करने अथवा यज्ञ कराने के बाद भी प्रभु की प्राçप्त होती थी। किन्तु आज कलियुग में भगवान नाम के स्मरण मात्र से परमात्मा की प्राçप्त सम्भव है। गोस्वामी तुलसीदास जी लिखते हैं कि कलियुग केवल नाम अधारा, सुमरि, सुमरि नर उतरहिं पारा। जड़ भरत के चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर दिग्विजय की प्राçप्त के उद्देश्य से भ्रमण पर उतरे महाराज पारीक्षत ने देखा कि कलियुग पृथ्वी रुपी गाय एवं बैल रुपी धर्म को डण्डे से मारता हुआ आगे बढ़ रहा है। कलियुग की इस धृष्टता को देखकर महाराज पारीक्षत ने उसे अपने राज्य की सीमा से बाहर चले जाने का आदेश दिया। किन्तु कलियुग ने उनसे विनम्रता पूर्वक अपने साथ रहने का स्थान मांगा। इस मौके पर अश्वनी पाठक, ऋषि मिश्रा, वीरेन्द्र दीक्षित, गोविन्द दास तिवारी आदि ने पूजा अर्चना की।

Vikas Sharma
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