बैंकों के रवैये से गरीब, बेरोजगार योजनाओं के लाभ से महरूम

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उरई – केंद्र तथा प्रदेश शासन की कल्याणकारी योजनाओं में बैंकों का रवैया सहयोगात्मक न होने के कारण अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आ रहे है। यही वजह है कि योजनाओं के लक्ष्य जनपद में पूरे नहीं होते है।

किसान क्रेडिट कार्ड योजना को ही लें जनपद में बैंकों को इस वर्ष 47070 किसान क्रेडिट कार्ड बनाने का लक्ष्य दिया गया था लेकिन इस वित्तीय वर्ष के लगभग 6 माह गुजर जाने के बाद 3830 कार्ड ही बनाये जा सके है जो लक्ष्य का 8 प्रतिशत है।

ग्रामीण क्षेत्रों में नवयुवकों के स्वरोजगार के लिये चलाई जा रही खादी ग्रामोद्योग बोर्ड, खादी ग्रामोद्योग कमीशन तथा लघु उद्योग की योजनाओं में तो स्थिति और भी दयनीय है। पिछले वित्तीय वर्ष में खादी ग्रामोद्योग बोर्ड से 25 लाभार्थियों को चयनित किया जाना था। 27 लाभार्थियों को प्रस्तावित किया गया जिसमें से 4 लाभार्थियों को ही बैंकों ने ऋण उपलब्ध कराया जबकि 31 अगस्त 2009 तक उक्त लक्ष्य पूरा हो जाना चाहिये था। इसी तरह खादी ग्रामोद्योग कमीशन में 25 लाभार्थियों को 5 लाख या उससे अधिक लागत की इकाइयों को लगाने के लिये सहायता दी जानी थी जिसमें 24 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुये। परीक्षण के बाद 3 ही बैंकों को प्रस्तावित किये गये पर बैंकों ने एक ही को सहायता उपलब्ध करायी।

लघु उद्योग के लिये 273 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुये 114 चयनित किये गये लेकिन बैंकों ने केवल 29 को ही वित्त पोषित किया है। इस वित्तीय वर्ष में अभी चयन किया जाना बाकी है। स्वर्ण जयंती स्वरोजगार समूह योजना जो ग्रामीण विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित की जाती है जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में समूह बनाकर रोजगार सृजन के कार्यक्रम चलाये जाते है। इस वर्ष 256 समूहों को वित्त पोषित किया जाना था जिसके लिये विभिन्न बैंकों को लक्ष्य दिये गये लेकिन 75 समूहों को ही वित्त पोषित किया गया जिसमें इलाहाबाद बैंक ने 106 के सापेक्ष 35, त्रिवेणी क्षेत्रीय ग्रामीण ने 126 के सापेक्ष 38 समूहों को वित्त पोषित किया है।

स्वर्ण जयंती स्वरोजगार योजना में 856 लाभार्थियों को सहायता मिलनी थी लेकिन 31 अगस्त तक केवल 100 लाभार्थियों को ही मिली जो लक्ष्य का 13 प्रतिशत है।

केंद्र शासन की सबसे महत्वपूर्ण योजना नरेगा के जॉबकार्ड धारकों के खातों के संचालन को लेकर बैंकों के संबंध में जो शिकायतें आ रही है वह भी बेहद चिंताजनक है। छात्रों की छात्रवृत्ति, वृद्धावस्था पेंशन, विकलांग पेंशन तथा विधवा पेंशन के खाते भी लाभार्थियों के लिये परेशानी का सबब बने हुये है।