बेहतर स्वास्थ्य की पहल के लिए कार्यशाला का आयोजन

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चित्रकूट- माताओं के बेहतर स्वास्थ्य की पहल के मकसद से स्वास्थ्य विभाग ने स्वयं सेवी संस्थाओं के साथ मिलकर कार्यशाला का आयोजन किया। मातृत्व मृत्यु दर को कम करने के ग्रामीण महिलाओं को जागरूक करने की बात की गई। कार्यशाला में प्रतिनिधियों ने स्वीकार किया कि अधिकार पाने वाले को खुद जागरूक होना पड़ेगा अन्यथा तमाम संस्थायें मंच टेंट व माइक लगाकर लाखों रुपये डकार कर चली जायेगी और पात्र असहाय ही बना रहेगा।

जिला पंचायत सभागार में आयोजित कार्यशाला में मुख्य चिकित्साधिकारी डा. आर डी राम ने कहा कि प्रदेश में 2007 से लागू राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना के बाद अब तक मातृत्व मृत्युदर कम हो गई है। वर्ष 2007 में मातृत्व मृत्यु दर प्रति एक लाख में 517 थी जो घटकर 440 तक हो गई है। वर्ष 2012 तक इसकी संख्या 100 तक पहुंचाने का लक्ष्य है। सीएमओ ने कहा कि आजकल प्रसूता महिलायें व आशायें 1400 रुपये के लिये स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करती है। बच्चा पैदा होने के बाद एक घंटे में चेक लेकर घर चली जाती है। जबकि यह धनराशि जच्चा-बच्चा के अच्छे स्वास्थ्य के लिये दी जाती है। अब विभाग टीकाकरण में भी जच्चा-बच्चा को तीन सौ रुपये प्रदान किये जायेंगे।

मुख्य चिकित्साधीक्षक डा. डी आर सिंह ने कहा कि ज्यादातर महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधा पाने के लिये खुद जाग्रत होना पडे़गा। ग्रामीण क्षेत्रों में जन जागरण अभियान चलाना पड़ेगा। समस्याग्रस्त व्यक्ति को किसी भी सुविधा को पाने के लिये अपने अधिकारों को जानना जरूरी है। अपर सीएमओ डा. आर आर सिंह ने कहा कि मातृत्व मृत्युदर कम करने के लिये गांव-गांव में पहुंचकर जागरूकता शिविर लगाना चाहिये। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के जिला प्रबंधक राजशेखर ने कहा कि कई स्वयंसेवी संस्थायें जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य के नाम पर सिर्फ शहरी क्षेत्र में शिविर लगाकर लाखों रुपये का गोलमाल करती है। ज्यादातर ग्रामीण प्रसूता महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी अधिकार पाने के लिये खुद जागरूक होना पड़ेगा। इसके बाद ही मातृत्व मृत्युदर कम होगी।