बुन्देली नाटक छत्रसाल

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Natak lokarpanअखिल भारतीय बुन्देलखण्ड साहित्य एवं संस्कृति परिषद ‘बुन्देली नाटक छत्रसाल’,नाट्य क्षेत्र में मील का पत्थर बुन्देली राष्ट्ीय साहित्य सम्मेलन, अनेक उपलब्धियों के साथ सम्पन्न भोपाल 23 दिसम्बर, अखिल भारतीय बुन्देलखण्ड साहित्य एवं संस्कृति परिषद् भोपाल के तत्वावधान में,मध्याॅंचल की सर्वाधिक प्राचीन लोक भाषा बुन्देली का दो दिवसीय राष्ट््ीय सम्मेलन बुन्देलखण्ड के प्रसिद्ध पर्यटन तीर्थ ओरछा में अनेक उपलब्धियों के साथ सम्पन्न हुआ।बुन्देली सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि बुन्देलखण्ड विष्वविद्यालय झाॅंसी के कुलपति एवं राष्ट्ीय साहित्य अकादमी के सदस्य डाॅ.सुरेन्द्र दुबे और विषिष्ट अतिथि जर्मनी की प्रोफेसर डाॅं.तत्याना ओरन्सका ने बुन्देली भाषा के महानाट्य ‘छत्रसाल’ का लोकार्पण करते हुये कहा कि यह बुन्देली नाटक छत्रसाल निष्चित ही मील का पत्थर सिद्ध होगा।बनारस विष्वविद्यालय के प्रो0कमलेष ने निरुपित किया कि मड़बैया जी का यह ग्रंथ नाटक के मापदण्डों पर खरा उतरता है।जीवाजी विष्वविद्यालय की वरिष्ठ शोध निदेषिका डाॅ.कामिनी ने संचालन करते हुये नाटक छत्रसाल की समीक्षा कर, लेखक कैलाष मडबैया के ऐसे अभूतपूर्व रचना कर्म के प्रति बुन्देलखण्ड की ओर से आभार जताया और कहा कि ‘बुन्देली के ललित निबंध’ और खण्ड काव्य ‘जय वीर बुन्देले ज्वानन की’ कृितयों की भाॅंति यह रचना भी लोक साहित्य के क्षेत्र में अभिनव धमाका है जिसकी अनुगूॅंज सदियों तक साहित्यिक क्षेत्र में बनी रहेगी।ओरछेष महाराज मधुकर शाह जू देव ने कहा कि बुन्देली भाषा को बचाना और बढ़ाना महान बुन्देली संस्कृति को बचाने के लिये आवष्यक है।बुन्देलखण्ड परिषद के राष्ट्ीय अध्यक्ष और वरिष्ठ साहित्यकार श्री कैलाष मड़बैया ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि बुन्देलखण्ड की सम्पन्न प्रकृति को संरक्षित कर हमें विनाष से बचाना होगा इसीलिये विचार मंथन की‘थीम’इस बार बुन्देलखण्ड की नदियों और पर्वतों पर केन्द्रित रखी गई है। समारोह में बुन्देलखण्ड के समस्त पचास जिला इकादयों के लिये वर्ष2018 कलेंण्डर का भी अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया। सम्मेलन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर 8वीं अनुसूची में बुन्देली को रखने की माॅंग और बुन्देली के भीष्म पितामह श्री कैलाष मड़बैया के 75वें वर्ष पर हीरक अभिनन्दन ग्रंथ के प्रकाषन का निर्णय लिया गया एवं ओरछेष के अधीनस्थ सम्पादक मण्डल का गठन भी किया गया। समारोह में राजीव राणा की बुन्देली ब्यंग कृति ‘लुक लुक की बीमारी’भी लोकार्पित की गई।पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री प्रदीप आदित्य की ओर से ‘शाॅंति देवी जैन पुरस्कार’ भी प्रदान किया गया।बुन्देली भाषा के राष्ट्ीय सम्मेलन का दूसरा सत्र बुन्देलखण्ड की प्रकृति पर केन्द्रित सम्पन्न हुआ जिसमें एक सौ से अधिक साहित्यकारों ने अपने शोध पत्रों का बाचन किया।रात्रि में अखिल भारतीय बुन्देली कवि सम्मेलन सम्पन्न हुआ जिसमें 50 प्रतिष्ठित कवियों ने एक नई उॅंचाई लोक साहित्य को प्रदान की।अन्तिम दिन बुन्देली के मानकीकरन की कार्यषाला सम्पन हुई जिसमें बुन्देली भाषा, जो अनेक बोलियों में बटी हुई है,को मानक स्वरुप प्रदान करने के लिये समूह बनाकर मंथन किया गया। आखिरी सत्र में नई किताबों पर समीक्षा की गई जिनमें’मयूर पंख’आदि अनेक ग्रंथों का विद्वानों द्वारा आकलन किया गया। समारोह में दतिया के श्री गोविन्दसिंह राजा विधायक ,षिक्षाविद बाबूलाल तिवारी झाॅंसी आदि भी सम्मिलित हुये।अन्त में दिवंगत अनेक साहित्यकारों के प्रति शोक प्रस्ताव पारित कर समापन किया गया।

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