बुन्देलखण्ड पर्यटन परिपथ योजना सरकार की हरी झण्डी का इंतजार

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झांसी-बुन्देलखण्ड के शासकों व श्रद्धालुओं ने अनेक मन्दिर, मूर्तियां, सरोवर, गढ़ी, किले व महलों का निर्माण कराया। इसके भग्नावेश आज भी बुन्देलखण्ड की गौरवशाली परम्परा के द्योतक है। यहां प्राकृतिक पर्यटक स्थलों की भरमार है, लेकिन सुविधाओं व व्यवस्थाओं के अभाव में पर्यटक रुकने से कतराते है। इस पर अंकुश लगाने व पर्यटकों को आकर्षित करने हेतु पर्यटन विभाग द्वारा 851.28 लाख की ‘बुन्देलखण्ड पर्यटन परिपथ’ योजना तैयार की है।

बुन्देलखण्ड के गौरवशाली इतिहास को संजोए किले, महल, गढ़ी, सरोवर व झीलों के साथ प्राचीन धरोहरों, शिल्प कला के अनूठे नमूनों को देखने के लिए देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की महत्वाकांक्षी योजना ‘बुन्देलखण्ड पर्यटन परिपथ’ को केन्द्र सरकार की हरी झण्डी का इंतजार है।

उपनिदेशक पर्यटन आर प्रसाद नें  बताया कि इस योजना को पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार के पास स्वीकृति हेतु भेजा गया है। इसमें बरुआसागर, तालबेहट, गढ़मऊ का पर्यटन विकास उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम के माध्यम से किया जाएगा। योजना में राजकीय संग्रहालय में पर्यटन सुविधा केन्द्र बनाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में यह केन्द्र अपने आप में इकलौता होगा। इसमें विदेशी मुद्रा के बदलने की सुविधा के अलावा कैफेटेरिया, साइबर कैफे, स्वागत केन्द्र, सोविनियर शॉप, कान्फ्रेंस हाल आदि निर्मित किए जाएंगे। संग्रहालय के बगीचे में म्यूजिकल कलर फाउण्टेन भी रंगीनियां बिखेरेगा।

180 वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत विशाल झील के पश्चिमी-दक्षिणी तट पर विद्यमान लघु पहाड़ी पर निर्मित बरुआसागर किले में भव्य विद्युत छटा, कान्फ्रेंस हाल, प्राचीन वस्तुओं का संग्रहालय, टिकट काउंटर का निर्माण किया जाएगा। झील के विहंगम दृश्य व प्राकृतिक छटा को निहारने हेतु किले में ब्यू प्लेटफार्म बनेगा और घाटों का जीर्णोद्धार किया जाएगा।

इस योजना में तालबेहट में मानसरोवर झील के किनारों को रमणीक बनाने, झील पर विद्युत छटा के साथ एक रेस्टोरेन्ट, पर्यटकों को जल बिहार हेतु वोट की व्यवस्था कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि गुप्तकालीन अवशेषों में देवगढ़ के समीप राजघाटी, नहर घाटी व सिद्ध गुफा में चट्टानों को काटकर सुन्दर प्रतिमाएं बनाई गई है। यहां का दशावतार मन्दिर और उसमें स्थापित नर-नारायण, गजेन्द्र मोक्ष तथा शेषशायी विष्णु की भव्य प्रतिमाएं शिल्प कला के अनूठे उदाहरण है। योजना में देवगढ़ की प्रतिमाओं को सुरक्षित, संग्रहालय व पर्यटक आवास ग्रह को विकसित व आकर्षक बनाया जाएगा। उन्होंने इसी वित्तीय वर्ष में इस योजना पर स्वीकृति मिलने की सम्भावना व्यक्त की है।

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