बुजुर्गों के आशीर्वाद से ही समाज व परिवार की तरक्की हो सकती है : नाना जी

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ग्रामोदय विश्व विद्यालय में यू थ्री ए सम्मेलन शुरू

चित्रकूट –   हमारी संस्कृति में सदा ही बड़े बुजुर्गों को पूजनीय माना गया है। गोस्वामी तुलसी दास ने भी रामचरित मानस में  प्रात काल उठि के रघुनाथा, मात-पिता गुरु नावहिं माथा चौपाई से बड़े  बुजुर्गों के आशीर्वाद से परिवार फलता-फूलता है।  हमारे वृद्धजन ही हमें अपनी संस्कृति से जोड़ते हुए समाज के हित में काम करने की प्रेरणा देते हैं।  इसलिए हमें अपने बड़े-बुजुर्गों का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए। इससे ही हमारी वसुधैव कुटुम्बुकम की नींव को बल मिलेगा।

महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित यू थ्री ए कांफ्रेंस का शुभारंभ सोमवार को किया गया। जिसका उद्घाटन पद्म विभूषण वयोवृद्ध समाजसेवी नाना जी देशमुख ने किया। उद्घाटन करते हुए अपने संबोधन में नाना जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में बुजुर्गों को परिवार का अभिन्न अंग माना गया है। उनके बिना परिवार अधूरा ही माना जाता रहा है। परन्तु आज आधुनिकता के रंग में रंगते हुए हम लोग अपने बुजुर्गों की उपेक्षा करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि वृद्धावस्था में ही लोगो को सेवा की आवश्यकता होती है। यदि हम परिवार में रहने वाले बड़े बुजुर्गों की सेवा नहीं करेंगे तो आगे आने वाली हमारी पीढ़ी भी हमारी उपेक्षा करना शुरू कर देगी। नाना जी ने कहा कि बुजुर्गों की सेवा ही सच्ची सेवा है। बुजुर्गों के मार्गदर्शन में ही समाज अपना विकास करता हैं और परिवार की तरक्की होती है। बिना बुजुर्गों के आशीर्वाद के वसुधैव कुटुम्बुकम के उद्देश्यों की पूर्ति नहीं की जा सकती। इसके बाद स्वागत भाषण के दौरान सद्गुरु सेवा संघ के ट्रस्टी डा. बी के जैन ने विश्वविद्यालय की स्थापना में नाना जी देशमुख के योगदान की चर्चा की। इस दौरान यहां उपस्थित ग्रामोदय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. आर एन कपूर ने बिना किसी सरकारी सहायता के आयोजित किए गए इस सम्मेलन को अपनी तरह का एक अलग आयोजन बताते हुए कहा कि इस सम्मेलन के बाद हमें वृद्धजनों की समस्याओं तथा उनके देखभाल के तौर तरीकों पर किए जा रहे कायो को सामने लाने में सहायता मिलेगी। विश्व यू थ्री के अन्तर्राष्ट्रीय सचिव टाम हालवे ने संस्था के इतिहास व कार्यों की जानकारी दी।

ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ज्ञानेन्द्र सिंह ने कहा कि अपने देश में यह कार्यक्रम पहली बार आयोजित किया गया है। जबकि एशिया में दूसरी बार आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने बढ़ती उम्र में होने वाली तकलीफों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि वृद्धों की आर्थिक विपन्नता, लाचारी, पारिवारिक विघटन के साथ-साथ परिवार से बहिष्कार का भी बुजुर्गों को सामना करना पड़ रहा है। जबकि वरिष्ठ नागरिकों के अनुभव व विशेषज्ञता तथा ज्ञन का प्रयोग करके ही उन्नति पाई जा सकती है। सम्मेलन में योग गुरु डा. सत्यम ने कहा कि योग से बुढ़ापा दूर किया जा सकता है। उन्होंने भारत शब्द की विवेचना करते हुए कहा कि भा अर्थात ज्ञान और रत का अथ प्रकाशित होता है जिसका मतलब ज्ञान से प्रकाशित होता है। उद्घाटन सत्रा के अन्तिम वक्ता के रूप में बोलते हुए उद्यमिता विद्यापीठ की निदेशक नन्दिता पाठक ने कहा कि अयं निज: परोवेति ही एक मात्रा विश्वबंधुत्व की भावना से ही विश्व का कल्याण है। इससे पूर्व वल्र्ड कांफ्रेंस की शुरुआत दीप प्रज्जवलन व सरस्वती वन्दना के साथ सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का संचालन डा. आशुतोष उपाध्याय ने किया। इसके अलावा दिल्ली सीनियर सिटीजन आफ इण्डिया के जे के गुप्ता, सम्मेलन संयोजक डा. आर सी सिंह एवं सचिव वीरेन्द्र व्यास ने मुख्य अतिथि को सम्मानित किया।

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