बुंदेलखण्ड की आवाज को दबाया तो भुगतने होंगे परिणाम

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ललितपुर- बुंदेलखण्ड इकलाबी फ्रण्ट के कार्यकर्ताओं ने बैठक कर प्रात निर्माण के मुद्दे पर सरकारों की बेरूखी पर रोष जताया। उन्होंने कहा कि बुंदेलखण्ड के दो करोड़ लोग विकास की दृष्टि से पिछडे़ हुए है। सरकारी योजनाओं का दीपक तो जल रहा है लेकिन दीपक तले अंधेरा बना हुआ है। इस मौके पर प्रमुख रूप से मौजूद नेमवि के पूर्व प्राचार्य प्रो. भगवत नारायण शर्मा ने कहा कि बुंदेलखण्ड को सरकारों ने अपने हाल पर छोड़ रखा है। यहा के मुर्झाए जीवन में केवल उद्योग ही खुशिया बिखेरने का कार्य कर सकते है लेकिन प्रदूषण रहित उद्योग लगाने के लिए इस क्षेत्र में कोई पहल नहीं की जाती।

वक्ताओं ने कहा कि बुंदेलखण्ड से परे निकटवर्ती उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश में जन्म लेने वाली प्रतिभाएं सुनहरे सपने देखने लगती है किंतु इस क्षेत्र में पैदा होने वाले नौनिहालों की किस्मत उपेक्षा, हताशा से बंधकर रह जाती है। क्षेत्र के लोगों को चपरासी तक की नौकरी ही लग जाए तो यह आईएएस व पीसीएस से कम नहीं लगती। बड़ी नौकरिया तो जिले के युवा ख्वाबों में ही देखते है। जिले में जो भी नौकरिया निकलती है उन पर अफसरों के परिजन व रिश्तेदारों के अलावा सत्ता से नजदीकी रखने वाले लोग कब्जा जमा लेते है। यदि पिछले 20 वर्षो के दौरान जिले में हुई नियुक्तियों पर नजर डाली जाए तो उनमें से 80 फीसदी बाहरी जनपदों के अभ्यर्थी सफल हुए। वहीं जिले के मेधावी छात्र आज भी सड़कों पर खाक छानते घूम रहे है। बार-बार इस क्षेत्र में राजनैतिक उतार-चढ़ाव आता है लेकिन इसके पश्चात भी राजनैतिक दल सबक नहीं लेते। वह बुंदेलखण्ड को अपने हाल पर छोडे़ हुए है। परिवर्तन इस क्षेत्र के लोग इस उद्देश्य से देखते है कि आने वाला समय सुखद होगा लेकिन यह अतीत से बुरा दिखायी पड़ता है। इस वजह से जिले के युवा जबरदस्त आक्रोश से भरे हुए है। सरकारों ने यदि समय रहते बुंदेलखण्ड के हृदय की आवाज को नहीं सुना तो इसके परिणाम गम्भीर व चौकाने वाले हो सकते है।

बैठक के दौरान कहा गया कि आज भी बुंदेलखण्ड में नौकरी तो दूर शिक्षा के लिए ही संघर्ष हो रहा है। बीमारी, कुपोषण, आर्थिक, सामाजिक विषमताओं से सभी के आसू बह रहे है। इसके पश्चात भी इस क्षेत्र की समस्याओं के निस्तारण में गम्भीरता नहीं दिखायी जाती। कार्यक्रम के दौरान जिलाध्यक्ष रवि पाराशर ने बताया कि संगठन की शाखाएं ग्रामीण स्तर पर शुरू करके उत्साही युवकों को एकजुट किया जाएगा। इस मौके पर पत्रकार सुरेन्द्र नारायण शर्मा, विनीत चतुर्वेदी, पार्षद राजेश दुबे, भरत रावत, अमित कटारे, एन.डी.तिवारी, जावेद खा, मनोज वैद्य, असलम मंसूरी, सचिन, दीपू, अमित, दिनेश ढिमोले, संजय सिंह, नितेश, ऋषि, कपिल चौबे, बल्लू कुशवाहा, बसंत, दशरथ, राजपाल, मुन्ना, शिव शकर, केशरी नंदन, मनीष, जय नारायण, रवीन्द्र, मनोज, दीपक, बॉबी जायसवाल आदि कार्यकर्ता मौजूद थे। संचालन अभिलेष पाण्डेय ने किया।