बुंदेलखंड की नाग पंचमी

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नाग पंचमी का पर्व  झाँसी सहित बुंदेलखंड में बड़े  श्रधा भक्ति और उल्लास के सात मनाया गया लोग सुबह से बेतवा नदी तालाबो  में इस्नान कर मंदेरो में पूजा अर्चना की और नाग देवता के दर्शन किये मंदिरों में आज मेला जेसा  माहोल रहा

संस्कार एवं संस्कृति के इस धनी देश में त्योहारों की लंबी श्रंखला है। बुंदेलखंड में  नाग पंचमी का पर्व ऐसा है जिसमें नाग को देवता के रूप में घर-घर पूजा जाता है।

इस दौरान मंदिरों में  महिलाओं की संख्या भारी मात्रा में रही। घरों में महिलाओं ने गोबर के आस्तिक बना कर दूबा और घी, गुड और अक्षतों से उनकी पूजा की।

बुंदेलखंड में खासियत यह है कि इस परंपरा से राजस्व महकमा जुड़ा हुआ है। लेखपाल नाग देवता का चित्र घर-घर जाकर चिपकाते हैं और लोग उन्हें शगुन में पैसा व अनाज देते हैं। जमींदारी समय से चली आ रही इस प्रथा को लेखपाल पूरे सम्मान से निभाते चले आ रहे हैं।

श्रवण शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवता भी नाग के रूप में अवतार लेते हैं तभी तो घर-घर नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा-अर्चना की जाती है। परिवार की खुशहाली, सुरक्षा व संपन्नता का आशीर्वाद मांगा जाता है। सावन की हरियाली छटा के बीच मनाये जाने वाले इस पर्व में महिलाओं व बच्चों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

बुंदेलखंड में खास प्रथा यह है कि नाग देवता का चित्र लेकर लेखपाल घर-घर पहुंचते हैं। बाजार से वह अपने क्षेत्र की जनसंख्या के आधार पर नाग देवता के चित्र थोक में खरीद लेते हैं फिर स्वयं व सहयोगी के साथ तड़के से ही नाग देवता का चित्र घर-घर जाकर मुख्य द्वार पर चिपकाने का काम करते हैं। बताते हैं कि परंपरा के अनुसार लेखपालों को लोग शगुन के रूप में पैसा व अनाज देते हैं। उनका यह मानना है कि पूर्व की परंपरा को हम निभा रहे हैं। झाँसी  सदर क्षेत्र के लेखपाल अरुण पण्डे  का कहना है कि जमींदारी के समय से यह प्रथा चल रही है  पहले पटवारी यह काम करते थे पदनाम बदला तो लेखपालों ने शुरू कर दिया था । मगर अब ये परम्परा धीरे धीरे ख़त्म होती जा रही है मगर हमे फक्र की  भारतीय और बुंदेलखंड की संस्कृति की  परंपरा से हम जुड़े हैं।

Vikas Sharma
Editor
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