बीज उत्पादन का लाभ बुंदेलखंड के किसानों को मिलेगा

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चित्रकूट- मंडलीय किसान मेला व गोष्ठी के अवसर पर लखनऊ से आये अपर कृषि निदेशक राम बली ने यहां पर मौजूद किसानों को सीधे बीज का उत्पादन करने की सलाह दी।अपर कृषि निदेशक  ने कहा कि अगर बीज का उत्पादन यहां पर सही रूप में होता दिखाई देगा तो फिर विभाग को संयंत्र स्थापित करने में कोई दिक्कत नही आयेगी और इसका सीधा लाभ बुंदेलखंड के किसानों को ही मिलेगा। मंडल का कोई भी किसान अगर बीज तैयार करने की हसरत रखता है तो वह सीधे तौर पर आकर लखनऊ में सम्पर्क कर सकता है।

गोष्ठी के अवसर पर बीज विकास निगम के महानिदेशक सरोज ने कहा कि बीज की कोई दिक्कत नही है। गोदामों में रबी के बीज आवश्कतानुसार मौजूद है। उन्होंने कहा कि अगर किसान यहां पर बीज तैयार करेंगे तो वे यहां की परिस्थिति के अनुकूल होंगे और उपज ज्यादा देंगे।

मुख्य विकास अधिकारी भारत यादव ने गोबर रूपी धन को नकदी धन मानते हुये इसे सुरक्षित करने की बात करते हुये कहा कि पशु पालन से ही यह संभव होगा। इससे न केवल बीमार होते खेतों की हालत में सुधार होगा बल्कि गौ पालन से और भी तमाम फायदे स्वत: ही हो जायेंगे। उन्होंने अन्ना प्रथा को बुंदेली खेती के लिये अभिशाप बताते हुये इसे खत्म करने के लिये जोर दिया। यादव ने कहा कि जिले में अब डीएपी खाद का संकट नही है, नई रैक उतर चुकी है। उन्होंने नरेगा व अन्य योजनाओं के बारे में किसानों को जानकारी दी।

संयुक्त कृषि निदेशक एल.एस.कटियार ने कहा कि किसान नयी तरह की खेती का प्रयोग सीखें और कृषि यंत्रों को समझें और अपने खेतों में इसका उपयोग करें। उप कृषि निदेशक मो. आरिफ सिद्दीकी ने कहा कि किसान मेला लगाने का उद्देश्य यहां पर आये किसानों की संख्या ने पूरा कर दिया। तीन दिनों तक किसानों ने यहां खेती की नई तकनीक की जानकारी विशेषज्ञों से ली है अब इसे उपयोग में लाने की जरुरत है।

जिला कृषि अधिकारी एचएन सिंह ने कहा कि खाद की समस्या तो लगभग समाप्ति की ओर है। उन्होंने कहा कि किसान अगर फसल से ज्यादा उत्पादन लेना चाहते हैं तो बीजों के साथ ही खाद को न डालें इससे बीज जल जाते हैं और आधे से ज्यादा नष्ट हो जाते हैं। इसलिये खाद और बीज के डालने के बीच में थोड़ी अंतर बनाकर रखें।

इस दौरान भूमि संरक्षण अधिकारी जी पी कुशवाहा, जिला सलाहकार राजहंस सिंह, राम विशाल के साथ ही बांदा, जालौन, हमीरपुर, महोबा व बांदा के भूमि संरक्षण व कृषि विभाग से जुड़े अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे। यहां पर ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कृषि विभाग के शिक्षक, छात्र-छात्रायें व महिला और पुरुष किसान मौजूद रहे।