बिना सोशल आडिट दिया जा रहा ग्राम पंचायतों को धन

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महोबा- शासन की सख्त हिदायत के बाद भी बिना आडिट कराये ही ग्राम पंचायतों को पैसा आवंटित किया जा रहा है। डीपीआरओ कहते हैं जब जरूरत होती है शासन खुद ही आडिट करा लेता है। उनका काम विकास कार्यो को गति देने का है। पैसा रोका जायेगा तो विकास योजनाएं प्रभावित होंगी।

प्रदेश सरकार ने गांव पंचायतों को 12वें वित्त व राज्य वित्त सहित अन्य मदों में दी जाने वाली ग्राम निधि के व्यय का सालाना आडिट कराने का निर्देश दिया था। प्रमुख सचिव ग्राम विकास के जारी निर्देश में स्पष्ट कहा गया था कि जब तक गांव पंचायतों की लेखा परीक्षण रिपोर्ट दाखिल न हो जाये उन्हें अगले वर्ष की धनराशि आवंटित न की जाये। बावजूद इसके गांव पंचायतों को ग्राम निधि का पैसा दिया जा रहा है। डीपीआरओ डीआर कुशवाहा बताते हैं 2006 में शासन ने अपने स्तर से चार्टर एकाउंटेंट नियुक्त कर लेखा परीक्षण कराया था। इसके बाद अब तक कोई आडिट नहीं कराया गया। बीते वित्तीय वर्ष में कबरई विकासखंड की सभी गांव पंचायतों को 1.73.70 करोड़ रुपये, चरखारी 87.32 लाख, जैतपुर को 1.13 करोड़ व पनवाड़ी को 1.05.65 करोड़ रुपये आवंटित किये गये थे। चालू वित्तीय वर्ष में कबरई के गांवों को 1.81 करोड़ के सापेक्ष 60.35 लाख, चरखारी के गांवों को 90.92 लाख के सापेक्ष 30.30 लाख, जैतपुर विकासखंड के गांवों को 1.5 करोड़ के सापेक्ष 35.10 लाख व पनवाड़ी विकासखंड के सभी गांवों को 1.10 करोड़ के सापेक्ष 36.70 लाख रुपये अब तक आवंटित किये जा चुके हैं। विकास योजनाओं की प्रगति के अनुसार इन्हें आगे भी पैसा आवंटित किया जायेगा। शासन%