बिजली बनेगी फिर भी रहेगा अँधेरा ?…..

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img_52681बुन्देलखण्ड की बिजली से वीवीआईपी जिले रोशन
बुन्देलखण्ड में जो बिजली बन रही है उसकी रोशनी प्रदेश के वीवीआईपी जिलों में पहुंच रही है और बुन्देलखण्ड के लोग अंधेरे में हैं। बुन्देखण्ड के झांसी में स्थित पारीछा थर्मल पॉवर प्लांट से रोजाना 970 मोगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है, जो सीधे उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन को बिजली देता है। ललितपुर के बजाज पॉवर प्लांट से 1980 मेगावॉट बिजली पैदा होगी। इसके अलावा राजघाट बांध की टरवाईनें पानी से 45 मेगावॉट विद्युत बना रहीं हैं। साथ ही माताटीला बांध की तीन टरवाईनों से 30 मेगावाट बिजली बन रही है। सौर ऊर्जा प्लांट भी बुन्देलखण्ड में करीब 90 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहे हैं, फिर भी बुन्देलखण्ड के जिलों को 12 से 14 घंटे ही बिजली नसीब हो रही है। बुन्देलखण्ड के सभी पॉवर प्लांट सीधे ग्रिड को बिजली भेजते हैं और वहां से बुन्देलखण्ड के हिस्से में सिर्फ दो सौ से तीन सौ मेगावाट बिजली ही आती है। जबकि, वीवीआईपी जिलों में शुमार इटावा, लखनऊ, रायबरेली व अमेठी जैसे जिलों को 24 घंटे बिजली दी जा रही है।

बुन्देलखण्ड के 13 जिलों को चाहिए कुल 600 मेगावाट बिजली
ललितपुर जिले में स्थित बजाज पॉवर प्लांट की एक इकाई जितनी बिजली बनाएगी उतनी बिजली पूरे बुन्देलखण्ड भाग यानि उत्तर प्रदेश के 7 जिले और मध्यप्रदेश के 6 जिलों को रोशन करने के लिए काफी है। सबसे ज्यादा 100 मेगावाट बिजली की खपत झांसी में ही होती है, और यहां से रेलवे को भी बिजली सप्लाई की जाती है। जबकि, दूसरे जिलों में इससे कम बिजली की खपत है।

बुन्देलखण्ड में कहां कितना उत्पादन
प्लांट क्षमता उत्पादन
पारीछा थर्मल पॉवर प्लांट 1120 970
बजाज पॉवर प्लांट (निर्माणाधीन) 1980 600
माताटीला बांध जलबिजली 30 30 वर्षाकाल
राजघाट बांध जलबिजली 45 45 वर्षाकाल
सौर ऊर्जा पॉवर प्लांट 90 90

उदघाटन के बाद विद्युत ट्रान्सफर करना बनेगा चुनौती
करीब-करीब बनकर तैयार हो चुके बजाज पॉवर प्लांट की एक इकाई शुरू होते ही यहां 600 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाने लगेगा। लेकिन, यहां उत्पान शुरू होने के साथ ही एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि यहां बनने वाली बिजली को ग्रिड में भेजे जाने के लिए ट्रान्समिशन लाईन ही तैयार नहीं है। प्लांट के अधिकारी इसे राज्य सरकार कर खामी बता रहे हैं। सबसे बड़ा संकट यह कि ललितपुर जिले के दो पावर सब स्टेशनों पर यदि बिजली सीधे भेजी भी गई तो भी उत्पादित बिजली का पूरी तरह से सदुपयोग नहीं हो सकेगा। पुरानी विद्युत लाईनों पर सीधे बिजली देना भी जोखिम भरा है।
हलाकि अब ऐसे हालातो की जानकारी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हो गई होगी इसी लिए मुख्यमंत्री ने पॉवर प्लांट के उदघाटन में जोकि 20 सितंबर निर्धारित था उसमे नहीं पहुचे . और उद्घाटन सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और केविनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने किया . लेकिन यहां बनने वाली बिजली का वितरण कैसे होगा यह यक्ष प्रश्र ही है। इसके आलावा कई और है सवाल

कीमत पर उठे सवाल
पारीछा पॉवर प्लांट यूपीपीसीएल को 3 रुपए की दर से बिजली सप्लाई कर रहा है, मगर बजाज पॉवर प्लांट ने 6.50 रुपए की दर से बिजली देने का प्रस्ताव विद्युत नियामक आयोग के पास भेजा है। इसके पीछे प्लांट निर्माण की लागत 10 हजार करोड़ से बढक़र 16 हजार करोड़ से अधिक हो जाना बताया गया है। साथ ही साल दर साल कीमत में बढ़ोत्तरी भी की जा सकती है। जबकि सबसे सस्ती बिजली पानी से तैयार की जा रही है जिसे 65 पैसे में दिया जा रहा है, लेकिन यह पानी की उपलब्धता या फिर बरसात के मौसम में ही टरवाईन चलने के बाद संभव हो पाता है।

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सौर ऊर्जा पॉवर प्लांट सबसे मुफीद
सौर ऊर्जा पॉवर प्लांटों को बड़ी संभावना के रूप में देखा जाने लगा है। बुन्देलखण्ड में अभी तक 7 सौर ऊर्जा पॉवर प्लांट लगाए जा चुके हैं जो 90 मेगावाट बिजली तैयार कर रहे हैं। ललितपुर स्थित 30 मेगावाट सौर ऊर्जा पॉवर प्लांट से प्राप्त जानकारी के अनुसार सौर ऊर्जा प्लांट दूसरे पॉवर प्लांटों से सस्ते पड़ते हैं। 10 मेगावाट उत्पादन क्षमता के प्लांट के लिए 80 करोड़ की जरूरत होती है और इसे पांच से 10 एकड़ जमीन में लगाया जा सकता है। इससे उत्पादित बिजली को 7 रुपए की दर पर ग्रिड को दिया जा रहा है। यह मंहगा इसलिए नहीं है क्योंकि इसी दर पर हम 12 साल तक यानि 2025 तक उत्तर प्रदेश पॉवर कॉर्पोरेशन को बिजली उपलब्ध कराएंगे, जो दूसरे प्लांटों से सस्ता होगा। इसके साथ ही यह पर्यापरण के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है और अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण नीति की शर्तों के तहत सभी देश सौर ऊर्जा पॉवर संयंत्रों को बढ़ावा दे रहे हैं।

पानी लेने में तोड़े नियम
बारिश नहीं होने के कारण जहां बुन्देलखण्ड एक बार फिर सूखे के मुहाने पर है वहीं पॉवर प्लांट के लिए बांधों से लिए जाने वाले पानी की शर्तों को भी ताक पर रखा गया है। एग्रीमेंट के मुताबिक बजाज पॉवर प्लांट को कुल 80 क्यूसेक पानी की प्रतिदिन जरूरत है। इसके लिए उसे 60 क्यूसेक पानी राजघाट नहर व 10-10 क्यूसेक पानी कचनोंदा व शहजाद बांध से पानी लेना था। इसके लिए प्लांट प्रशासन को 32 लाख मीटर नहरों की लाईनिंग करनी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। बताया गया था कि कच्ची नहरों की लाईनिंग कर वह 25 प्रतिशत पानी को जमीन में सीपेज होने से बचाएंगे और उसी बचाए गए पानी से प्लांट में बिजली पैदा करेंगे। फिलहाल ऐसा कुछ नहीं किया गया। लाईनिंग के कार्य में औपचारिकता ही निभाई गई। रेलवे लाईन भी नहीं डाली गई, जिस कारण कोयला की सप्लाई प्लांट तक नहीं हो पाई। इससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है।

उजड़ रहे गांव, संवर रहे उद्योगपति
बजाज पॉवर प्लांट की स्थापना के पूर्व जमीन देने वाले ग्रामीणों को विकास व रोजगार की उम्मीद थी। सरकार भी यही कह रही थी। मगर, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। ललितपुर के चिगलौआ व मिर्चवारा गांव में जहां पॉवर प्लांट लगा वहां विकास के नाम पर प्लांट तो है, लेकिन गांव बदहाल है। जमीन देते समय ग्रामीणों से प्लांट के अधिकारियों और सरकार ने कहा था कि गांव की सूरत बदल जाएगी। सडक़ें पक्की बनाने, गांव में स्कूल बनाने से लेकर अस्पताल बनाने की जिम्मेदारी प्लांट की ही शर्तों में शामिल था, लेकिन कुछ भी नहीं बनाया गया। चार हजार की आवादी वाले इस गांव में किसी को रोजगार तक नहीं दिया गया। प्लांट के भीतर करीब एक हजार मजदूर जो काम कर रहे हैं वह बिहार और मद्रास के हैं। कांग्रेसी नेता प्रदीप जैन कहते हैं, किसानों की जमीन पर जो भी उद्योग लगे उसमें किसान परिवार के एक एक सदस्य को नौकरी मिलना चाहिए। पॉवर प्लांट के अधिकारियों ने भी ऐसा ही वादा किया था और अब मुकर गए हैं।

अलग बने बुन्देलखण्ड ग्रिड
बिजली के मुद्दे पर पिछले कई सालों से आंदोलन करते आ रहे पूर्व केन्द्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन आदित्य पर सरकार ने दो दर्जन से भी अधिक मुकदमे दर्ज करा दिए हैं। इसके बाद भी प्रदीप जैन ने डेरा डालो, घेरा डालो आंदोलन की शुरुआत कर सरकार के ऊपर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। प्रदीप जैन आदित्य कहते हैं , कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बुन्देलखण्ड के हक के लिए यहां आकर संघर्ष किया है। बुन्देलखण्ड दो हाजार मेगावाट बिजली का उत्पादन करने के बाद भी अंधेरे में है, यह यहां के लोगों के साथ इंसाफ नहीं है। जो बिजली बुन्देलखण्ड में बन रही है उसके लिए बुन्देलखण्ड ग्रिड अलग से बनना चाहिए। हमारी बिजली पर पहला हक हमारा ही होना चाहिए। जितनी बिजली पारीछा या बजाज पॉवर प्लांट की एक इकाई पैदा करती है बुन्देलखण्ड को उतनी ही बिजली की जरूरत है, फिर भी यहां बिजली न देकर सरकार इसे वीवीआईपी जिलों में पहुंचा रही है। यहां की जनता अंधेरे में है। हम अपना हक मांग रहे हैं और इसके लिए राहुल गांधी के निर्देशन में कांग्रेस और बड़ा आंदोलन शुरू करेगी।

कोयला लिया, उत्पादन हुआ नहीं
फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट (एफएसए)के तहत पॉवर प्लांट को मार्च 2015 तक बिजली का उत्पादन शुरू करना था, लेकिन इस समय सीमा में उत्पादन शुरू ही नहीं हो सका। यहां कोयला आता रहा और उत्पादन शुरू नहीं किया गया। तो वहीं पारीछा थर्मल पॉवर प्लांट में कोयला नहीं होने के कारण कई बार इकाईयों ने काम करना बंद कर दिया, जिससे बिजली का बड़ा नुकसान झेलना पड़ा। पारीछा पॉवर प्लांट के महाप्रबंधक के अनुसार, पारीछा में कोयले की भारी कमी है। यहां कोयले का स्टॉक कम है। रोज जितना कोयला आता है वह पूरा खत्म हो जाता है। पिछले चार महीने में कई बार कोयले की कमी होने के कारण इकाइयों को बंद करना पड़ा है।

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