बारिश से मनरेगा का काम हुआ ढीला

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जोरदार बारिश ने किसानों के चेहरे भले ही खिला दिए हों, लेकिन मजदूरों के चेहरे मुरझा गए हैं। मानसून की झड़ी ने गांवों के मजदूरों का रोजगार छीन लिया है। मात्र तेरह दिन में मनरेगा के तहत संचालित होने वाले प्रोजेक्टों की प्रगति चालीस प्रतिशत तक नीचे आ गई है।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत ग्रामीण इलाकों में 11 तरह की साढ़े तीन हजार परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें चेकडैम, बंधी निर्माण, कूप पक्का करण, भूमि सुधार, सड़क निर्माण आदि पक्के कार्यों की श्रेणी में आते हैं। वर्तमान में जिले में 2012 परियोजनाओं पर पक्के काम चल रहे हैं। बबीना विकासखंड में 112, बड़ागांव विकासखंड में 137, बंगरा विकासखंड में 212, बामौर विकासखंड में 278, चिरगांव विकासखंड में 288, गुरसरांय विकासखंड में 264, मोंठ विकासखंड में 341 एवं मऊरानीपुर विकासखंड में 280 परियोजनाओं को जून तक पूरा हो जाना चाहिए था। एक जून से 15 जून तक अधिकतर परियोजनाएं 45 प्रतिशत पूरी हो गई थीं, लेकिन 16 से 28 जून तक उनमें महज 15 प्रतिशत ही काम हो सका है। दरअसल, 21 जून से शुरू हुए मानसून ने इन कामों को प्रभावित कर दिया है। इसका सबसे ज्यादा असर मजदूरों पर पड़ा है।

Vikas Sharma
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