बरुआसागर के किले का हुआ कायाकल्प

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झासी-खजुराहो राष्ट्रीय राजमार्ग पर झील पर ग्रेनाइट पत्थर व ईटों से निर्मित अमूल्य सास्कृतिक निधि एवं बुन्देलखण्ड की गौरवशाली परम्परा का प्रतीक बरुआसागर के प्राचीन किला का कायाकल्प हो गया है।

2.5 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले इस किले के उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग के संरक्षण में आने से पूर्व बीटीसी प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित था। किले का परकोटा जगह-जगह से क्षतिग्रस्त था व विविध तलों के कक्षों की अनेक छतें भी धराशायी हो चुकी थीं। दीवारें व छतें फटी होने से वर्षा का पानी टपकता रहता था। किले का पूर्वी-उत्तरी कोना अत्यधिक क्षतिग्रस्त था। मनचलों द्वारा महल की दीवारों पर अपने नाम व सन्देश आदि खरोंच-खरोंच कर लिख देने से वह बदसूरत हो गई थीं। पुरातत्व विभाग ने चरणबद्ध रूप से शनै:-शनै: सीमित संसाधनों में संरक्षण कार्य कराया।

इसके बाद 48 लाख रुपये की लागत से व्यापक स्तर पर किले का कायाकल्प किया गया। अब किले के चारों ओर का विशाल परकोटा ,उसमें बने 9 बुर्ज , तीन प्रवेश द्वार एवं मुख्य प्रवेश द्वार देखते ही बनते है। किले के मध्य भाग में 2816 वर्ग मीटर क्षेत्र में 30 मीटर ऊंचा पाच मंजिला राजमहल निर्मित है। उसके भूतल व प्रथम तल पर 16-16, द्वितीय पर 22, तृतीय पर 5, चतुर्थ तथा पंचम तल पर स्थित एक-एक कक्षों की दशा सुधर गई है। सभी तलों पर पहुचने हेतु पंक्तिबद्ध सोपान की सुन्दर व्यवस्था है।

द्वितीय तल पर अलग-अलग बने दो आगन, उत्तरी छोर पर बारादरी और आगन के पूर्वी छोर पर निर्मित चहारदीवारी पर मेहराबों की दशा भी सुधर गई है। इन मेहराबों से सघन उपवन व झील का बड़ा ही मनोहारी दृश्य दिखाई देता है। पाचवीं मंजिल पर निर्मित लघु कक्ष में छिद्र युक्त मेहराबों का प्राविधान है। ग्रीष्म काल में ये कक्ष लू रहित, हवादार एवं ठण्डा रहते हैं।

क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा. एसके दुबे ने बताया कि किले की बाउण्ड्री के साथ ही पाथवे, स्थान-स्थान पर बैंच, पीने के पानी की व्यवस्था व शौचालयों का भी निर्माण किया गया है। उन्होंने अमूल्य धरोहरों को कुरूपित या क्षतिग्रस्त करने से बचाने व इसे भावी पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखने की अपील की है।

पुरातत्व निदेशालय लखनऊ की क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई बुन्देलखण्ड क्षेत्र के तत्वावधान में बरुआसागर किले में विश्व धरोहर दिवस पर 19 से 25 नवम्बर तक विविध कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी ने बताया कि किले में 19 नवम्बर को प्रात: 11 बजे मण्डलायुक्त टीपी पाठक कार्यक्रम का उद्घाटन करेगे। इस दिन बुन्देलखण्ड की ऐतिहासिक धरोहरों व स्मारकों के चित्रों की प्रदर्शनी लगेगी व चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। प्रदर्शनी 25 नवम्बर तक चलती रहेगी।