बजट के अभाव में ठप्प पड़ी हैं कई योजनाएं, मजदूरों को भी नहीं मिल रही मजदूरी ग्राम्य विकास मंत्री के विधान सभा क्षेत्र वाले विकास खण्ड का हाल काम न मिलने के कारण पलायन कर रहे हैं ग्रामीण

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बजट न मिलने के कारण केन्द्र व प्रदेश सरकार की कई जनकल्याणकारी योजनाएं ठप्प पड़ी हुई हैं। इसके अलावा पैसा न मिलने के कारण मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों की मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है। जबकि मजदूरी के चक्कर में वे लोग बीडीओ कार्यालय के आए दिन चक्कर लगाते रहते हैं। वहीं खण्ड विकास अधिकारी भी यही कहते हैं कि ग्राम पंचायतों के खाते में पर्याप्त बजट न मिलने के कारण ही काम नहीं हो पा रहे हैं। जबकि बजट उपलब्ध कराने के लिए कई बार शासन को लिखा गया है। लगातार कई वर्ष से सूखे की स्थिति का सामना कर रहे लोगों को काम उपलब्ध करवाते हुए उनका पलायन रोकने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना लागू की गई थी। जिसमें नित नए निर्देश जारी कर ग्रामीणों को गांव में ही सौ दिन का रोजगार देने के लिए सरकार द्वारा हर ग्राम पंचायत को पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने का दावा भी किया जाता है। लेकिन स्वयं ग्राम्य विकास मन्त्राी के विधान सभा क्षेत्र वाले विकासखण्ड मानिकपुर में ग्राम पंचायतों में प्रदेश सरकार द्वारा संचालित दर्जनों योजनाएं धन की कमी के कारण जहां ठप्प पड़ी हैं। वहीं खेत का पानी खेत में, कूप खनन, खेतों मे तालाब खुदाई, बागवानी आदि ऐसे कार्यक्रम भी हैं जिन्हें मनरेगा के तहत प्रदेश सरकार द्वारा संचालित किया गया है। उनमें भी बजट न होने के कारण या तो काम नहीं हो रहा और कहीं कुछ थोड़ा बहुत काम हुआ भी है तो इसमें काम करने वाले मजदूरों को मजदूरी नहीं दी गई। इतना ही नहीं मजदूरों द्वारा रोज-रोज पैसा मांगने के कारण कार्य प्रभारियों द्वारा काम करवाने से हाथ खड़े कर दिए गए है। जिसके चलते सूखे से जूझ रहे पाठा के बहुत से वाशिन्दे बाहरी क्षेत्रों में भी रेाजगार की तलाश में जाने लगे हैं। इस विषय में जब खण्ड विकास अधिकारी राजाराम कुरील से बात की कई तो उनका कहना था कि उनके द्वारा ग्राम पंचायत वार व क्षेत्र पंचायत के लिए मनरेगा से बजट की मांग की गई है। बजट आने पर ही काम होंगे व मजदूरी भुगतान किया जा सकेगा।