फर्जी संस्थानों व शिक्षा माफियाओं से छात्र बचें

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चित्रकूट- चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के समापन पर दूरवर्ती शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन विषय पर विचार विमर्श के लिए मप्र के विभिन्न क्षेत्रों से आये दूरवर्ती अध्ययन केंद्र प्रभारियों और केंद्र के अधिकारियों के बीच संवाद हुआ। केंद्र प्रभारियों ने पाठ्यक्रम संचालन में आने वाली कठिनाइयों के आधार गुणवत्ता संवर्धन के लिए सुझाव दिये।

दूरवर्ती शिक्षा के सहायक कुलसचिव जयप्रकाश शुक्ल ने कहा कि मोटी रकम लेकर अल्प समय में डिग्री देने वाले फर्जी संस्थानों और शिक्षा माफियाओं से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को बचना चाहिये। इसके अलावा प्रवेश फार्म की सभी प्रविष्टियों को भरने में सावधानी बरती जानी चाहिये। संयोजक डा. नीलम चौरे ने कहा कि संपर्क कक्षाएं और परामर्श कक्षाएं दूरवर्ती पाठ्यक्रम की धुरी है। परामर्श कक्षाओं में छात्रों को काउंसलर्स के सीधे संपर्क में आकर पाठ्यक्रम संबंधी समस्या समाधान का मौका मिलता है। उप कुलसचिव दूरवर्ती परीक्षा डा. जितेंद्र शर्मा ने दूरवर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़े करने वालों को आड़े हाथों लिया। मुख्य समन्वयक दूरवर्ती डा. वीरेद्र व्यास ने समापन भाषण में कहा कि गुणवत्ता संवर्धन के लिये अध्ययन केंद्रों और विश्वविद्यालय के बीच आगे की प्रक्रिया जारी रहेगी। इसके पूर्व विवि में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. ज्ञानेंद्र सिंह ने किया। उन्होंने अध्ययन केंद्रों द्वारा प्रस्तुत की गई समस्याओं का सम्यक हल बताते हुये कहा कि दूरवर्ती अध्ययन केंद्रों को विश्वविद्यालयीन व्यवस्था और दूरवर्ती प्रणाली का सम्मान करना होगा। विचार विमर्श के दो दिवसीय कार्यक्रम में मप्र के 54 अध्ययन केंद्र प्रभारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय निदेशक भोपाल डा. के एस तिवारी व विशिष्ट अतिथि के रूप में कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. शिवराज सिंह सेंगर और भोज मुक्त विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय निदेशक सतना डा. राजीव तिवारी ने शिरकत की।

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