प्रार्थना पत्रों की जाच से पीड़ित को अवगत कराना आवश्यक – डी.आई.जी.

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ललितपुर- थाना दिवस व कोतवाली में आने वाले प्रार्थना पत्रों की जाच और उनका निस्तारण पूरी गम्भीरता से किया जाये। इसके साथ-साथ प्रार्थना पत्र देने वाले प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति को उसके मामले में क्या कार्यवाही की गई है इससे भी अवगत कराया जाये ताकि जनता का विश्वास पुलिस पर बना रहे। यह बात कोतवाली परिसर में आयोजित थाना दिवस की अध्यक्षता करते हुए शासन की ओर से थाना दिवसों की समीक्षा करने आये डी.आई.जी.अभियोजन अविनाश चन्द्र ने अपने सम्बोधन में कही। उन्होंने कोतवाली परिसर का निरीक्षण किया एवं अभिलेखों का मुआयना करते हुए अपराधों की समीक्षा की।

लोकसभा चुनाव में मुंह की खाने के बाद प्रदेश की बसपा सरकार जनता के प्रति अब ज्यादा संवेदनशील दिखायी दे रही है। तहसील व थाना दिवस जो प्रत्येक सप्ताह आयोजित किये जाते थे। जिससे उनका महत्व कम हो रहा था इसलिये प्रदेश शासन ने अब मात्र माह के पहले व अंतिम मंगलवार को तहसील दिवस तथा इसी प्रकार पहले व अंतिम शनिवार को थाना दिवस का आयोजन करने के निर्देश दिये। इसी के तहत आज कोतवाली में आयोजित थाना दिवस में डी.आई.जी. अभियोजन ने लखनऊ से आकर थाना दिवस में आने वाले फरियादियों की शिकायतों को तो सुना ही साथ ही पिछले थाना दिवसों के प्रार्थना पत्र के निस्तारण की समीक्षा भी की। उन्हौने कोतवाली के जाच प्रार्थना पत्रों के रजिस्टर का निरीक्षण करते हुये कोतवाल को निर्देशित किया कि इसमें जाच के बिन्दु एवं इसकी कार्यवाही के बारे में भी अंकित किया जाये ताकि जब कोई अधिकारी इस रजिस्टर का मुआयना करे तो उसे यह भी जानकारी हो सके कि सम्बन्धित प्रार्थना पत्र पर क्या कार्यवाही हुई है। आज थाना दिवस में कुल 15 प्रार्थना पत्र आए जिनमें से 6 का तत्काल मौके पर जाकर निस्तारण कर दिया गया। शेष 9 प्रार्थना पत्रों को दो दिन के अन्दर निस्तारित करने के निर्देश सम्बन्धित लेखपाल व पुलिस को डी.आई.जी. ने दिये। थाना दिवस में जिले के पुलिस के मुखिया पुलिस अधीक्षक अखिलेश्वर राम मिश्र, अपर पुलिस अधीक्षक शफीक अहमद, उपजिलाधिकारी राकेश कुमार श्रीवास्तव, क्षेत्राधिकारी विपुल कुमार श्रीवास्तव, कोतवाल एस.के. कुलश्रेष्ठ व कोतवाली के सभी उपनिरीक्षक मौजूद थे।

थाना दिवस के उपरान्त डी.आई.जी. ग्राम बम्हौरी सर पहुचे जहा आयोजित चौपाल कार्यक्रम में भाग लिया। यद्यपि तेज गर्मी व धूप के चलते यहा अधिकारी अधिक देर न ठहर सके। इस चौपाल में आधा घटे रूककर डी.आई.जी. ने गाव के अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों से स्वयं बातचीत कर कानून व सुरक्षा की स्थिति के सम्बन्ध में पूंछताछ की और उनकी शिकायतों को सुना।