प्रशासन लस्त मिलाबट खोर मस्त

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जिले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन का बुरा हाल है। पांच तहसीलों में खाद्य पदार्थों के नमूना लेने मिलावट खोरी रोकने के लिए केवल तीन इंस्पेक्टर हैं, जबकि इनके सुपरवीजन के लिए स्वास्थ्य विभाग के चार और प्रशासन के आठ अफसर तैनात हैं। इसके बाद भी तीन माह की रिपोर्ट शून्य है।

मिलावट खोरी को रोकने और जनसामान्य को स्वच्छ खान पान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैनात किए गए फूड इंस्पेक्टरों का बुरा हाल है। झांसी जिले की पांच तहसीलों में मिलावटखोरी रोकने के लिए तीन इंस्पेक्टर तैनात हैं। इनका काम समयसमय पर चेकिंग करना और नमूने भरना है, लेकिन पिछले चार माह से कहीं भी और कोई भी नमूना नहीं भरा गया। इन इंस्पेक्टरों के कार्य की निगरानी के लिए एक मुख्य खाद्य निरीक्षक तैनात हैं। इनके अलावा डिप्टी सीएमओ, अपर सीएमओ, सीएमओ स्वास्थ्य विभाग निगरानी करते हैं। वहीं प्रशासनिक तंत्र में जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी नगर मजिस्ट्रेट उनका सुपरवीजन करते हैं। इंस्पेक्टरों ने काम किया है अथवा नहीं, इसकी पुष्टि संबंधित तहसील क्षेत्र के परगनाधिकारी करते हैं। जिले के पांचों परगनाधिकारियों की रिपोर्ट के बाद ही वेतन आहरित किया जाता है।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन स्थानांतरित किए जाने को लेकर चार माह पहले कुछ लोग कोर्ट में पहुंच गए। स्टे के कारण स्थानीय स्वास्थ्य प्राधिकारी ने कोर्ट पर्ची जारी करनी बंद कर दी। नतीजतन, कहीं भी नमूना भरने का काम नहीं हुआ। नमूना भरने के कारण परगनाधिकारियों ने इंस्पेक्टरों को ओके रिपोर्ट नहीं दी। इस कारण उनके वेतन पर रोक लगा दी गई है।

Vikas Sharma
Editor
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