प्रधान खा रहे शौचालयों का पैसा

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झाँसी की ग्राम सभाओं में बनवाए गए शौचालयों में धांधली के आरोपों की जब जांच कराई तो सच सामने आ गया आरोप सही पाए गए। जिला पंचायत राज अधिकारी ने बामौर व मोंठ ब्लॉक के दो पूर्व ग्राम प्रधानों व ग्राम पंचायत अधिकारी को नोटिस जारी कर उनके द्वारा की गई वित्तीय गड़बड़ी की रिकवरी करने के आदेश दिए हैं।

बामौर के ग्राम आलमपुरा के वर्तमान प्रधान संतोष कुमार ने प्रशासनिक अधिकारियों व जिला पंचायत राज विभाग में शिकायती पत्र देते हुए बताया था कि उनसे पूर्व प्रधान के कार्यकाल में शासन द्वारा 199 शौचालयों का निर्माण कराने की स्वीकृति दी गई थी। इसके लिए शासन से 23.88 लाख रुपये भी स्वीकृत किए गए थे। तत्कालीन प्रधान ने शौचालयों के निर्माण में लापरवाही बरती और वित्तीय अनियमितताएं कीं।

जिला पंचायत राज अधिकारी ने जिला कंसल्टेंट मनोज कुमार से मामले की जांच कराई। डीपीआरओ केके सिंह के अनुसार जांच के दौरान पाया गया कि शौचालयों की डिजाइन मानक के अनुरूप नहीं थी। साथ ही कई शौचालयों में दरवाजा भी नहीं लगाया गया था। इसके अलावा कहीं गढ्ढा नहीं था तो कहीं मानक पूरे नहीं थे।

जांचकर्ता को कुछ ग्रामीणों ने बताया कि तत्कालीन ग्राम प्रधान के कहने पर उन्हें महज निर्माण सामग्री दी गई थी, निर्माण उन्होंने स्वयं कराया। इसके एवज में उन्हें मजदूरी भी नहीं मिली। उन्होंने बताया कि तत्कालीन ग्राम प्रधान प्रभा देवी द्वारा शौचालय निर्माण में कुल 1.62 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता पाई गई। इस पर उन्हें व ग्राम सेक्रेट्री से 1.62 लाख रुपये की वसूली का नोटिस जारी किया गया है।

इसी प्रकार की शिकायत मोंठ ब्लॉक के ग्राम अमरौख निवासी शिखा नामदेव ने मुख्यमंत्री को भेजी थी, जिसमें कहा गया था कि पूर्व प्रधान के कार्यकाल में गांव में 153 शौचालयों के निर्माण के लिए 18.36 लाख रुपये की धनराशि जारी की गई थी। लेकिन पूर्व प्रधान ने निर्माण कार्य में वित्तीय अनियमितताएं कीं और मानक के अनुरूप शौचालय नहीं बनवाए।

डीपीआरओ ने इसकी जांच भी जिला कंसलटेंट मनोज कुमार से कराई और आरोप सही पाए। जांच के दौरान कुल 1.44 लाख रुपये की वित्तीय गड़बड़ी पाई गई। इस पर गांव के तत्कालीन प्रधान चंद्रभान राय व ग्राम पंचायत अधिकारी से 1.44 लाख रुपये की वसूली के लिए नोटिस जारी किया गया है।