प्रदूषण से सिमटती जा रही मंदाकिनी

0
265

चित्रकूट। तीर्थ क्षेत्र की पवित्र मंदाकिनी नदी प्रदूषण से मुक्त नहीं हो पा रही है। पिछले एक दशक से लगातार सिमट रही मंदाकिनी की सफाई के प्रति क्षेत्रवासियों का रवैया भी उदासीन नजर आ रहा है।

विश्व प्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र की मंदाकिनी नदी का अस्तित्व इन दिनों खतरे में है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार गंगा मां को प्रदूषण मुक्त करने वाली मंदाकिनी मौजूदा समय में जगह-जगह गंदा नाला बनी नजर आ रही है। मप्र के उद्गम स्थल से निकलने के बाद मठाधीशों व संत, महंतों के स्वार्थपूर्ण निर्माण कार्यो का खामियाजा भी इस नदी को भुगतना पड़ रहा है। इसके चलते बीते एक दशक में नदी में तीव्र गति से जल स्तर घटा है। जल स्तर घटने जिले की जीवनधारा मानी जाने वाली मंदाकिनी कई तटवर्ती गांव में अब पानी उपलब्ध कराने में असमर्थ हो चुकी है। क्षेत्रीय जनता के भारी विरोध के बावजूद जगह-जगह नियमित हुए बांधों ने नदी की सुंदरता नष्ट करने में कसर नहीं छोड़ी है। तीर्थ क्षेत्र स्थित विभिन्न मठ मंदिर मंदाकिनी को प्रदूषित करने में आम जन मानस से कहीं आगे है। इन मठ मंदिरों ने नदी में नालियां खोल रखी हैं। जिससे नदी का पानी नहाने योग्य भी नहीं रह गया है। नदी नालों के गंदे पानी के साथ नदी में कूड़ा करकट फेंकने वालों की भी कमी नहीं है। पूर्व में नदी को प्रदूषण मुक्त कराने के लिये शासन व स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रयास भी जन-जागरूकता के अभाव में निरर्थक साबित हो रहे है। सीतापुर के रामघाट में प्रशासन ने साबुन लगाकर नहाने और कपड़े धोने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बावजूद रामघाट में सैकड़ों स्नानार्थी कभी भी साबुन लगाकर नहाते देखे जा सकते है। क्षेत्र के किसी नेता के अब तक मंदाकिनी सफाई के मुद्दे को लेकर अपनी रुचि नहीं दर्शायी है। जिसका प्रमुख कारण प्रदूषण मुक्त मंदाकिनी को लेकर क्षेत्रवासियों की उदासीनता है। शायद इसीलिये पवित्र मंदाकिनी अपनी दुर्गति पर आंसू बहा रही है।