प्रदूषण से कम होता जा रहा मंदाकिनी में पानी

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चित्रकूट- महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विवि के पर्यावरण विभाग के पूर्व छात्रों ने अब मंदाकिनी को बचाने के लिए कमर कस ली है। अलग-अलग संस्थानों में कार्यरत पूर्व छात्रों ने तीर्थक्षेत्र में आकर मंदाकिनी को बचाने के लिए डेरा डाल रखा है। लोक विज्ञान संस्थान देहरादून के सहयोग से पर्यावरण वैज्ञानिक डा. रमेश चंद्र त्रिपाठी के नेतृत्व में मंदाकिनी नदी के प्रवाह के विभिन्न स्थानों पर जल संग्रह कर नमूनों का अध्ययन किया गया।

डा. त्रिपाठी ने बताया कि नदी में जल प्रवाह नदी के जीवंत होने को दर्शाता है। जब नदी में पर्याप्त प्रवाह नहीं होता तो वह मृत हो जाती है। उन्होंने कहा कि पूर्व वर्षो की तुलना में आज नदी में लगभग आधा जल प्रवाह ही रहा है। उन्होंने बताया कि रामघाट पर गहराई निरंतर कम होती जा रही है। 10 वर्ष पूर्व रामघाट पर लगभग 3-4 मीटर जल रहा करता था, पर कुछ वर्षो से केवल 2 से 3 मीटर गहरा पानी बचा है। इस वर्ष मई-जून में भरतघाट व रामघाट में 0.5-1.5 मीटर गहराई मिली थी। इससे स्पष्ट होता है कि मंदाकिनी में जल प्रवाह की स्थिति में निरंतर कमी होती जा रही है। उन्होंने कहा कि दीपावली जैसे मेलों में उत्तम प्रबंध करके प्रशासन बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को सजग और जागरूक करके इस पावन नदी को बचाने का काम कर सकता है। मंदाकिनी के घाटों और चित्रकूट के विकास के लिए पर्यावरण परिस्थित की हितैषी योजनाएं बनाने की जरूरत है।