प्रदीप जैन पांच साल सत्ता का सुख भोगने के बाद, अब करने लगे कांग्रेस की खिलाफत

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jhansi- पूर्व केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्‍यमंत्री प्रदीप जैन के सुर अचानक बगावती हो उठे हैं। इन्‍होंने अपनी ही पार्टी के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है। जैन का कहना है कि कांग्रेस ने अपने कार्यकाल के दौरान उनकी कई अहम मांगों और बातों को दरकिनार किया है। इसी का भुगतान उसे लोकसभा चुनाव 2014 में भुगतना पड़ा है। हालांकि, इस दौरान उन्‍होंने पीएम नरेंद्र मोदी या फिर बीजेपी का पक्ष लेने की बात भी नहीं की।

prdeep-jain पत्रकार वार्ता के दौरान जब उनसे एक-एक कर कई सवाल पूछे गए तो उन्‍होंने झल्‍लाते हुए कहा ‘मैं कोई प्रधानमंत्री नहीं था जो अपनी सभी मांगों को पूरी करा सकता।’ उनके इस झल्‍लाहट से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि कांग्रेस में मंत्रियों की मांगों और उनकी बातों को कितनी तरजीह दी जाती रही होगी। बताते चलें कि, इससे पहले प्रदीप अपनी पार्टी की कई बार जमकर तारीफ कर चुके हैं। उन्‍होंने साल 2011 में एक बयान दिया था कि गैर कांग्रेसी सरकारों में यूपी का बंटाधार हो गया है।
प्रदीप जैन ने बताया कि कांग्रेस के कार्यकाल में उन्‍हें बिल्‍कुल तवज्‍जो नहीं दी गई। इसके कारण उनकी कई मांगों को अनसुना कर दिया गया। उन्‍होंने कहा कि ‘मैंने हॉकी के जादूगर मेजर ध्‍यानचंद्र को भारत रत्‍न दिए जाने की मांग सरकार से की थी। इसके अलावा विकास को लेकर बुंदेलखंड को राज्‍य का दर्जा दिए जाने की भी मांग की थी।’ इन दोनों मांगों को सरकार ने अनसुना कर दिया था। जैन ने इस बात को लेकर काफी अफसोस भी जताया।
प्रदीप जैन ने बताया कि इन दोनों मांगों को लेकर उन्‍होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को 200 से अधिक सांसदों को एक पत्र भी सौंपा था। इसके अलावा पूरी क्षमता के साथ उन्‍होंने अपनी बात सरकार के सामने रखी थी। इसके बावजूद सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानी।