प्रचार प्रसार न होने से फ्लाप रहा पहला नरेगा दिवस

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महोबा- प्रचार प्रसार के अभाव में पहला नरेगा दिवस बेनामी साबित हुआ। अधिकारी घंटों बैठे इंतजार करते रहे और गिने चुने लोग ही शिकायत दर्ज कराने आये। वह खुद हतप्रभ थे कि हर गांव में भारी समस्याएं होने के बावजूद फरियादी नहीं आये।

जनपद की तीनों तहसीलों में जिलाधिकारी द्वारा नामित अधिकारियों ने नरेगा दिवस के तहत शिविर लगा जन शिकायतें सुनी। तीनों तहसीलों में उपजिलाधिकारियों की देखरेख में हुआ यह कार्यक्रम बुरी तरह फ्लाप हो गया। कारण इस सम्बन्ध में किसी भी गांव में किसी तरह की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी न ही अखबारों अथवा अन्य किसी माध्यम से इस कार्यक्रम का कोई प्रचार प्रसार कराया गया था। इस अव्यवस्था के चलते नरेगा की बदहाली के शिकार श्रमिकों को कार्यक्रम की जानकारी नहीं हो पायी। लिहाजा भारी संख्या शिकायतें होने के बाद भी ग्रामीण श्रमिक आयोजन में नहीं पहुंच पाये। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है कि परसाहा से शिकायत करने आये दो दर्जन से ज्यादा मजदूर तहसील परिसर में आयोजित नरेगा दिवस के आयोजन के जगह जिलाधिकारी आवास पहुंच गये। प्रचार प्रसार के अभाव का हश्र यह रहा कि मुख्यालय के आयोजन में मात्र दो शिकायतें आयी। कुलपहाड़ तहसील में केवल सात और चरखारी में पांच शिकायतें दर्ज की गई। उल्लेखनीय है कि जिले का कोई गांव ऐसा नहीं है जहां नरेगा से जुड़ी दर्जनों शिकायतें न हों। बावजूद इसके नरेगा दिवस में ग्रामीणों का न आना आयोजन की असफलता को इंगित करता है।