पेशेवर राजनीति निगल गई कर्तव्य परायणता

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चित्रकूट। वर्तमान राजनीति का परिदृश्य देख कर प्रख्यात समाजसेवी नानाजी देशमुख खासे आहत हैं, उनका कहना है कि राजनेताओं में खुद की और देश के प्रति जिम्मेदारी नाम मात्र की भी नहीं रह गयी है। सफेदपोशों ने राजनीति को पूरी तरह से धंधा बना लिया है, वे लोगों की नहीं अपनी और अपने परिवार की उन्नति कर रहे हैं। उनका साफ कहना है कि राजनीति के दूषित माहौल को देखकर अब उन्होंने तो नेताओं से मिलना तक बंद कर दिया है।

मोरारजी देसाई के प्रधानमंत्रित्व काल में उद्योग मंत्री का प्रस्ताव ठुकरा चुके नानाजी ने 60 बरस की उम्र में यह कर राजनीति से संन्यास ले लिया था कि राजनीति में युवाओं को भी मौका दिया जाना चाहिए। पिछले दो वर्षो से 93 वर्षीय प्रख्यात समाज सेवी नानाजी हालांकि देखने में शारीरिक रूप से अक्षम हैं, लेकिन उनकी सक्रियता पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ा है। वे व्हील चेयर पर बैठकर लोगों से रूबरू होते हैं।

चित्रकूट में उनके आवास पर कुछ देर की बातचीत के दौरान समाजसेवा के लिए पद्मश्री व पद्मविभूषण से अलंकृत नानाजी ने राजनीति की दुर्दशा के लिए नेताओं को ही जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि वे जनप्रतिनिधि बनने के लिए चुनाव में खड़े तो हो जाते हैं पर जीतने के बाद उनको सिर्फ पैसा ही दिखाई पड़ता है। उनकी धनलोलुपता का ही परिणाम है कि देश के सभी संसदीय क्षेत्रों के विकास के लिए शुरू की सांसद निधि का जमकर दुरुपयोग हो रहा है।

नानाजी राजनीति में नेताओं द्वारा जातिवाद का जहर घोल कर कुर्सी पाने की चाहत से भी खासे व्यथित दिखे। उनका कहना था मायावती हों चाहे मुलायम या फिर शरद पवार, सभी पीएम बनने की होड़ में लगे हुए हैं, किसी को आम जनता की फिक्र नहीं है। इन सभी को भरत के आदर्शो से प्रेरणा लेनी चाहिए जिनको भगवान राम ने सत्ता सौंप दी थी लेकिन इसके बावजूद उन्होंने उसका परित्याग कर दिया।

नानाजी भाजपा से भी खासे नाराज दिखे। उनका कहना था कि मंदिर के लिए मस्जिद तोड़ना पूरी तरह से गलत था और जिस रामलला के कारण भाजपा ने सत्ता हथियाई वही उसके आदर्शो को ही भूल गयी। उन्होंने कहा कि पार्टी द्वारा जो घोषणा पत्र दिये जाते हैं वे सिर्फ दिखावा मात्र हैं। भाजपा ने जो घोषणा पत्र में कहा है कि सत्ता में आने पर वह जम्मू-कश्मीर से धारा-370 हटा लेंगे वह पूरी तरह से भ्रामक है, क्योंकि केंद्र में उसको पूर्ण बहुमत तो हासिल नहीं होने वाला और त्रिशंकु सरकार में वह अपने उद्देश्य में कामयाब नहीं होने वाली।

महंगाई और गरीबी से जूझ रही जनता के बावत उनका कहना था कि चंद उद्योगपतियों के अमीर होने से संपूर्ण देश का विकास नहीं हो सकता, जबतक कि गांवों के विकास पर ध्यान नहीं दिया जाता तब तक विकास की परिकल्पना करना ही अनुचित है।

बाल ठाकरे और राज ठाकरे द्वारा महाराष्ट्र में भड़काऊ भाषण देकर क्षेत्रवाद फैलाने को नानाजी अनुचित मानते हैं। उनका कहना था कि अपनी-अपनी राजनीति चमकाने के चक्कर में दोनों नेता देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इसी प्रकार वरुण ने जो बयान दिया वह भी दुर्भाग्यपूर्ण था।

बुंदेलखंड में सूखे के कारण किसानों द्वारा आत्महत्या किये जाने की बावत नानाजी का कहना था कि इन आत्महत्याओं पर भी खूब राजनीतिक रोटियां सेकी गयीं। किसी ने भी जाकर किसानों के दर्द को नहीं पूछा।

देश को मार्गदर्शन देने वाले संतों की बावत नाना जी ने कहा कि आज के संत केवल पैसा एकत्र करते हैं। हवाई जहाज में सैर सपाटा करने वाले ये संत लोगों का भला करने के बारे में क्या सोचेंगे?