पेयजल योजना अधर में लटकी

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जल संकट को ध्यान में रख जल निगम ने करीब दो सौ करोड़ की पेयजल योजना का प्रस्ताव साल भर पहले शासन को भेज दिया पर इसकी वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल रही। प्रस्ताव में शहर मुख्यालय के साथ-साथ बबेरू और नरैनी भी शामिल हैं।

शहर में पेयजल को लेकर गर्मियों में जबरदस्त मारामारी मचती है। सप्लाई न मिलने से शहर के दर्जन भर से अधिक मोहल्ले पानी के लिए त्राहि-त्राहि करते हैं। शहर में पेयजल आपूर्ति कुछ कुओं के अलावा प्रमुख रूप से केन नदी से होता है। लगातार घट रहे भूगर्भ जल स्तर से आने वाले समय में यह स्थित उत्पन्न होगी कि लोगों को पानी के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। इस स्थिति से निपटने के लिए पहले से ही जल निगम ने बांदा पुनर्गठन पेयजल योजना के नाम से एक प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। जल निगम के अधिशासी अभियंता एम.पी सिंह के अनुसार योजना के प्रथम भाग में चिल्ला स्थित यमुना नदी में 143.79 करोड़ का प्लांट और भाग दो में 48.93 करोड़ की पाइप लाइन बिछायी जायेगी। मगर 192.72 करोड़ के इस प्रस्ताव पर शासन स्तर से अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। जबकि वर्ष 2008-09 में भेजे गये प्रस्ताव का जल निगम को बेसब्री से इंतजार है। सिंह ने बताया कि इसके साथ-साथ बबेरू में 3.57 करोड़ और नरैनी में 4.03 करोड़ की लागत से पेयजल परियोजनायें लगाने का प्रस्ताव भी इसी में शामिल किया गया है।सिंह ने बताया कि फिलहाल शहर को पेयजल मुहैया कराने के लिए ट्यूबवेल लगाकर इंदिरा नगर में पानी की टंकियां स्टोर करने के लिए बनायी जा रही हैं। जमालपुर से पाइप लाइन के जरिये यहां तक नलकूपों से पानी लाया जायेगा। इसके लिए लाइन बिछाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है।