पानी न होने से गर्मी चरम सीमा पर

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महोबा- वर्षा के शुरुआती संकेत बेहद भयावह हैं। पानी न होने से गर्मी अपने चरम पर है। लिहाजा चारों ओर त्राहि-त्राहि मची हुई है। इंद्रदेव की कृपा पाने के लिये पूजा हवन और अनुष्ठान का दौर चल रहा है।

गत वर्ष जून माह में जनपद में औसत 270.54 मिमी वर्षा हुई। पूरे महीने रुक-रुक कर बारिश होने से मौसम भी सुहाना हो गया था। इस वर्ष हालात ठीक विपरीत है। पहली जून को मामूली वर्षा हुई थी। जिले में इसे औसत 9.7 मिमी रिकार्ड किया गया है। इस लिहाज से पिछले जून की तुलना में इस जून माह में मात्र 3.5 फीसदी वर्षा हुई। यही कारण है कि धूप की तपन व हवाओं की प्रचंड गर्मी अब तक जारी है। भीषण गर्मी से लोगों का जीना हराम हो गया है। मानसून का रुख देख किसानों की रूह कांप रही है। बीते चार साल के सूखे के बाद गत वर्ष की वर्षा से उनके चेहरों में मुस्कान लौटी थी पर मौसम का मिजाज देख वह हवा हो गई है। जिला प्रशासन भी सूखे की आशंका से भयाक्रांत है। कृषि विभाग के अधिकारी मानते है कि मानसून की देरी से खरीफ की फसलें पिछड़ रही है। इसका सीधा प्रभाव उत्पादन की भारी कमी के रूप में सामने आयेगा। किसान हो या अधिकारी सभी इंद्रदेव की ओर आशा भरी निगाहों से निहार रहे है। उनकी कृपा पाने के लिये जगह-जगह हवा पूजन और अनुष्ठान का दौर शुरू हो गया है।