पानी देख टूट पड़ते इंसान और जानवर

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बांदा- जनपद में जल संकट गहराता ही जा रहा है। एक ओर लोगों को जहां पीने के पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है, वही मवेशी भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। जलस्रोतों में इंसानों और जानवरों का तांता लगा रहता है।
सूखे के कारण यहां तालाब, पोखरों का पानी तो सूख ही गया था, जल स्तर नीचे खिसकने से जमीने भी चटकने लग गई थी। बरसात में जोरदार बारिश हुई तो चारों तरफ पानी ही पानी नजर आने लगा। इससे जल स्तर ही ऊपर नही उठा, बल्कि लोगों को लगा कि पानी का दुर्दिन खत्म हो गया है। मगर गर्मी की शुरूआत होते ही एक बार फिर पानी लोगों के सामने बड़ी समस्या बनकर मुंह बाये खड़ा है। पोखर सूख गये, हैंडपम्प और कुएं जवाब देने लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अहम समस्या बने जल संकट से इंसान तो क्या जानवर भी परेशान है। लोगों को पीने का पानी जुटाने के लिए दूर-दराज से तमाम जद्दोजहद करनी पड़ रही है तो मवेशी सूखी हलक तो तर करने के लिए भटक रहे हैं। यहां तक पानी की तलाश में मवेशी गुम भी हो रहे है।
कमोवेश शहरी क्षेत्र के हालात भी यही है। शाम-सुबह आने वाली पानी की सप्लाई को लोग पर्याप्त नही मान रहे। सुबह 6 बजे से एक घंटे तक चलने वाले पानी से लोग दिनचर्या तक को तरस रहे है। शाम का जलापूर्ति का कोई ठिकाना नही होता। शहर के कई मुहल्लों में हैंडपम्पों से पानी भरने वालों की लम्बी लाइने लगती है।