पाठा कोल अधिकार मंच के लोगों ने मानिकपुर विकास खण्ड के पाठा क्षेत्रा का भ्रमण कर ग्रामीणों की समस्याएं जानी

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पाठा कोल अधिकार मंच के लोगों ने मानिकपुर विकास खण्ड के पाठा क्षेत्रा का भ्रमण कर ग्रामीणों की समस्याएं जानी और  जिलाधिकारी को पत्रा लिख उनका निस्तारण कराने की मांग की है

मानिकपुर विकास खण्ड के पिछड़े ग्रामीण इलाकों के लोगों की हक की लड़ाई लड़ने वाले पाठा कोल अधिकारी मंच के रामभवन  सहित  राज्य स्तरीय समन्वयक लोकहकदारी मोर्चा के रामनरेश, व अश्वनी कुमार आदि ने पाठा के उमरी, बेलहा, चुरेह, केशरुवा, गुरौला, दराई, गोपीपुर, करौंहा, छेरिहा बुजुर्ग, छेरिहा डाडी, चूल्ही, बराह, रामपुर, नागर, खदरा, कल्यानपुर, लक्ष्मनपुर, शेखापुर आदि गांवों का भ्रमण कर यहां रहने वाले ग्रामीणों की समस्याएं सुनी। इन लोगों ने बताया कि पाठा क्षेत्रा में गर्मी की शुरुआत नहीं हुई है और अभी से पानी के लिए हा-हा कार मचना शुरू हो गया है। ग्रामीणों को कई-कई किलोमीटर दूर तक जाकर पानी का इन्तजाम करना पड़ता है। रामभवन ने बताया कि ज्यादातर गांवों में या तो हैण्डपंप खराब पड़े हैं या फिर पानी कम दे रहे हैंं। यदि यही हाल रहा तो मई जून की भीषण गर्मी में यहां के लोगों  बिना पानी के प्यास ही रहना पड़ेगा। उन्होंने पाठा वासियों के लिए पानी के ठोस इन्तजाम करने मांग जिला प्रशासन से की है। वहीं रामनरेश बताते हैं कि खिचरी ग्राम पंचायत के लोगों को अपना राशन का सामान लेने के लिए दूसरे गांव में जाना पड़ता है। उनका कहना है कि ग्रामीणों ने उन्हें जानकारी दी कि खिचरी का कोटा किन्हीं कारणों के कारण अधिकारियों ने निरस्त कर दिया और इसे उनके गांव से लगभग दस किमी दूर गुरौला गांव में संबद्ध कर दिया गया। जिससे उन्हें काफी परेशानी होती है। ग्रामीणों ने बताया कि जब तक वे दूसरे गांव राशन सामग्री लेने जाते हैंं। तब तक दूकान बन्द हो जाती है। और उन्हें खाली हाथ वापस लौटना पड़ता है। इसके अलावा यदि सबेरे से जाते हैं तो उनके सारे काम अधूरे रह जाते हैं और समय बबाZद होता है। जबकि ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने अधिकारियों से कई मांग की है कि जब तक उनके गांव की दुकान बहाल नहीं हो जाती तब तक नजदीक ही स्थित हेला गांव की दुकान से उनका कोटा संबद्ध कर दिया जाए तो उन्हें ज्यादा दिक्कत नहीं होगी। समाजसेवियों ने जिलाधिकारी को पत्रा लिख ग्रामीणों की समस्याओं का निराकरण करने की मांग की है।